
हाथरस 08 सितम्बर। हाथरस के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को सम्मान देने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। 115वें मेला श्री दाऊजी महाराज के अंतर्गत आगामी 21 सितंबर 2026 को जाट शिरोमणि वीर राजा दयाराम और उनके सुपुत्र महान स्वतंत्रता सेनानी राजा महेंद्र प्रताप सिंह की स्मृति में विशेष सरकारी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राजा दयाराम की ऐतिहासिक भूमि पर पिछले 115 वर्षों से मेला श्री दाऊजी महाराज का आयोजन होता आ रहा है। ऐसे में पहली बार मेले के मंच से हाथरस के इन महान ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के संघर्ष, राष्ट्रप्रेम और योगदान का गौरवगान किए जाने की तैयारी है। बताया जाता है कि स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजपाल सिंह दिशवार लंबे समय से राजा दयाराम और राजा महेंद्र प्रताप सिंह की ऐतिहासिक विरासत को उचित सम्मान दिए जाने की मांग उठाते रहे हैं। उन्होंने इस विषय को लगातार प्रशासन के समक्ष रखा और मेले से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को प्रमुखता दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मामला वर्तमान जिलाधिकारी अतुल वत्स के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। जिलाधिकारी की देखरेख में 21 सितंबर को विशेष स्मृति कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम का संयोजक उपजिलाधिकारी, हाथरस को बनाया गया है।
यह रहेगा कार्यक्रम का स्वरूप
- आयोजन स्थल: श्री दाऊजी महाराज मेला पंडाल, हाथरस
- दिनांक: 21 सितंबर 2026
- आयोजन: विशेष सरकारी स्मृति कार्यक्रम
- मुख्य विषय: राजा दयाराम और राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जीवन, संघर्ष, राष्ट्रप्रेम एवं ऐतिहासिक योगदान
- मुख्य उद्देश्य: नई पीढ़ी को हाथरस की ऐतिहासिक विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े गौरवशाली अध्यायों से परिचित कराना।
प्रशासन की ओर से कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आयोजन को लेकर हाथरस के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में भी उत्साह है। स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने जिलाधिकारी की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि किसी भी शहर की पहचान केवल उसके वर्तमान विकास से नहीं, बल्कि उसके गौरवशाली अतीत से भी होती है। ऐसे में दाऊजी मेले जैसे ऐतिहासिक आयोजन के मंच से राजा दयाराम और राजा महेंद्र प्रताप सिंह की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण कदम है। अब 21 सितंबर को दाऊजी महाराज मेले का मंच न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का साक्षी बनेगा, बल्कि हाथरस के इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष की गौरवगाथा भी वहां गूंजेगी।














