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सिकन्दराराऊ (हसायन) 06 सितम्बर। कस्बा के मोहल्ला किला खेडा में सुंदर कांड के संगीतमय वातावरण में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।सुंदर कांड की शुरुआत भगवान श्रीराम दरबार के छायाचित्र तस्वीर के समक्ष घृत देशी घी की दीप प्रज्वलित कर भवेश धार्मिक संकीर्तन सुंदर कांड मंडल के संचालनकर्ता भवेश सेंगर के द्वारा विधि विधान के साथ मंत्रोच्चारण कर किया।सुंदर कांड के पाठ के मुख्य आचार्य भवेश सेंगर ने बताया कि सुंदरकांड का वर्णन भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है, जो हनुमान जी की भक्ति, बुद्धि और विनम्रता को बहुत ही सरल और भावुक अंदाज में प्रस्तुत करता है।सुंदरकांड की महिमा और इसके मुख्य प्रसंगों को समझने के सुंदरकांड संपूर्ण रामायण का प्राण और सबसे श्रेष्ठ भाग है।उनका मानना है कि यदि रामायण से हनुमान जी को अलग कर दिया जाए तो उसका सारा रस समाप्त हो जाएगा।सुंदरकांड का मुख्य आध्यात्मिक सार हनुमान जी की नि:स्वार्थ भक्ति: जब हनुमान जी लंका जलाकर लौटते हैं।तो वे अपनी वीरता का कोई श्रेय खुद नहीं लेते।हनुमान जी प्रभु राम से कहते हैं—”लंका को सीता जी के विरह की आग ने, आपके प्रताप ने और मेरे पिता (पवन देव) ने जलाया है,मैं तो बस एक माध्यम था।”हनुमान जी का यही अहंकार-शून्य स्वभाव उन्हें महान बनाता है।जब कोई भक्त अपने सारे यश और अहंकार का त्याग कर देता है,तो स्वयं भगवान उसका यश गाते हैं। श्री राम ने भी हनुमान जी की इसी महिमा का गान किया है।जब रास्ते में सुरसा हनुमान जी को खाने के लिए अपना बदन बढ़ाती है (“जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा…”), तब हनुमान जी उससे दुगना रूप धारण करते हैं।लेकिन अंत में वे अत्यंत छोटे होकर उसके मुख से बाहर निकल आते हैं।सुंदर कांड के पाठ का सुमिरन इस बात का आधात्म प्रमाण है कि जब जीवन में परिस्थितियां या विरोधी बड़े हो जाएं, तो शक्ति से ज्यादा बुद्धि और विनम्रता का प्रयोग करना चाहिए।सुंदरकांड के पाठ को लेकर भक्तों को कुछ विशेष बातें बताई हैं।सुंदरकांड का नियमित पाठ करने से मनुष्य के सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। सुंदर कांड के सुमिरन करने से बजरंगबली की शीघ्र कृपा हनुमान जी कलयुग के जाग्रत देवता हैं और वे अपने भक्तों पर सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं।सुंदर कांड में लिखा हुआ कि हमारे कर्म अच्छे हों और हम सच्चे मन से सुंदरकांड का पाठ करें,तभी हमें इसका पूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ मिलता है।सुन राजा अब त्याग दे झूठा मान गुमान। दो दिन के सब ठाठ है,दो दिन के शान भज ले पगले हरि हरि।।धीरे धीरे संकट कट जाएगें,कट जाएगें गम हट जाएगें।देवों के देव कहाए दोनो हाथों से लुटाए,दानी ना कोई ऐसा सारी दुनिया बतलाए।मरघट में डेरा डाला भूतों संग रहने वाला भूतेश्वर डमरू वाला बिगडी बनाए।।,काग रे काग तू मांग रे मांग तेरो अनुराग मेरों मन भाए।संपति देहू कि सदगति देहू वो देहू मै आज जो तोहे सुहाए।।देवा हो देवा हनुमत देवा रामायण में आना ढोल मजीरे बाज रहे है राम की कथा सुनाना बोलो राम राम राम।तीन बार भोजन भजन एक बार राम तेरी माला जपी न एक बार।मेरा बम बम भोला खो गया हरिद्वार के मेले में हरिद्वार के मेले में कावडियों के मेले मे।कार्यक्रम में सुरेश सविता,सुमन सविता,राजेन्द्र गुप्ता उर्फ राजे लाला,दिनेश चन्द्र शर्मा,विष्णु वार्ष्णेय,भगवान सिंह बघेल,चन्द्र प्रकाश माहौर,संजीव सविता,अंकुल सविता,सुभाष चंद्र सविता उर्फ जैन साहब,प्रिंस कुमार,सपना कुमारी,शिवानी सविता,अमित सविता,सुमित सविता,संजय स्वर्णकार,बौबी अग्रवाल,अमित भारद्वाज, रामबाबू सविता,मोहनलाल सौखिया,नीटू सविता सहित तमाम धर्म प्रेमी मौजूद रहे।

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