सादाबाद 03 सितम्बर। तहसील परिसर में आलू किसानों की चार सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 25 दिन से चल रहा धरना गुरुवार को एक बड़ी किसान पंचायत के साथ खत्म हुआ। इस पंचायत में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत समेत प्रदेश के कई बड़े पदाधिकारी शामिल हुए। पंचायत में आलू की गिरती कीमतों, किसानों की लागत और फसल का सही दाम नहीं मिलने का मुद्दा मुख्य रूप से उठाया गया। चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि भाकियू लंबे समय से आलू किसानों की आवाज उठा रही है। सरकार को आलू की कीमतों में कम-ज्यादा होने को रोकने के लिए उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाना होगा। उन्होंने बताया कि इस बार आलू के दाम कम होने से किसान अगले साल बुवाई कम कर देगा। करीब 30 प्रतिशत तक बुवाई घट सकती है। इससे अगले साल कीमत बढ़ेगी और किसान फिर ज्यादा आलू बोएगा। इसी तरह पांच-छह साल का चक्र चलता रहता है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को जनसंख्या और बाजार की जरूरत के हिसाब से आलू की मांग का हिसाब लगाकर उत्पादन की योजना बनानी चाहिए। कई जगह किसानों को एक रुपये किलो तक आलू बेचने की नौबत आ रही है। ऐसे में किसान पैसे की दिक्कत में फंस रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों को है, जिन्होंने ठेके पर जमीन लेकर खेती की है। टिकैत ने कहा कि आलू किसानों की लड़ाई जोर-शोर से जारी रहेगी। आंदोलन को अब जिलेवार आगे बढ़ाया जाएगा। आलू बेल्ट के अलग-अलग जिलों में पंचायतें और बैठकें कर किसानों को जोड़ा जाएगा। उन्होंने स्थानीय सांसद और विधायक से भी संसद व विधानसभा में आलू किसानों की समस्या उठाने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन ने सरकार को आलू किसानों की समस्या को लेकर पत्र भी भेजे हैं। किसानों की आवाज लगातार उठाने से राहत के लिए पैसे देने का ऐलान हुआ है, लेकिन किसानों की समस्या का पक्का हल जरूरी है। पंचायत में यह भी घोषणा की गई कि 21 सितंबर को पूरे जिले में आलू किसानों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद धरना स्थगित कर दिया गया।








