
हाथरस 02 सितंबर। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) हाथरस के ‘क्रॉप कैफिटेरिया’ में धान की पांच उन्नत किस्मों पर महत्वपूर्ण शोध कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना और उन्हें उन्नत खेती की व्यवहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है। क्रॉप कैफिटेरिया में किसानों के अवलोकन और अध्ययन के लिए सीएसआर 49, सीएसआर 36, पूसा बासमती 1692, पूसा बासमती 1509 और पूसा बासमती 1718 जैसी धान की उन्नत किस्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इन किस्मों के माध्यम से किसानों को विभिन्न परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन की संभावनाओं से परिचित कराया जा रहा है।
परियोजना के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती के माध्यम से धान की खेती करने की तकनीक भी सिखाई जा रही है। इसके साथ ही लवणीय भूमि में सूक्ष्म जीवों के उपयोग के जरिए खेती को सफल बनाने की नवीन तकनीकों की जानकारी किसानों को दी जा रही है, जिससे कम अनुकूल भूमि में भी कृषि उत्पादन को बेहतर किया जा सके। यह शोध एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम केवीके के प्रभारी अधिकारी डॉ. एसआर सिंह के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। इसमें कृषि वैज्ञानिक डॉ. बलवीर सिंह, डॉ. आकांक्षा सिंह, डॉ. हरिवेंद्र पाल और डॉ. शैलजा देवी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए किसानों को नई कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।केवीके की इस पहल से किसानों को खेत पर ही उन्नत धान की किस्मों, प्राकृतिक खेती और लवणीय भूमि में सूक्ष्म जीवों के उपयोग जैसी तकनीकों को समझने और अपनाने का अवसर मिल रहा है।













