हाथरस 02 सितंबर। निराश्रित गोवंश के संरक्षण और गो-आश्रय स्थलों को बेहतर बनाने के लिए जिले में करीब 10.19 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए 21 प्रमुख गो-आश्रय स्थलों को चिन्हित करते हुए 73 अवस्थापना कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इन कार्यों के जरिए गोशालाओं की क्षमता बढ़ाने के साथ उन्हें सुरक्षित, सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जाएगा। प्रशासन ने जिले के गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण एवं समीक्षा करने के बाद उनके पुनर्गठन की योजना तैयार की है। प्रस्तावित निर्माण कार्यों में बड़े टिन शेड, चरही, प्रीकास्ट चारदीवारी, भूसा भंडारण शेड, गोपालक एवं केयरटेकर कक्ष तथा बीमार और छोटे गोवंश के लिए अलग आइसोलेशन वार्ड बनाए जाने के कार्य शामिल हैं।
प्रशासन की योजना चयनित गो-आश्रय स्थलों को अधिक क्षमता वाले केंद्रों के रूप में विकसित करने की है। छोटी और कम उपयोग वाली गोशालाओं में मौजूद गोवंश को नजदीकी बड़ी गोशालाओं में समायोजित किया जाएगा। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होने के साथ गोवंश की देखभाल भी अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी। ब्लॉकवार प्रस्तावित कार्यों में सादाबाद में करीब 1.73 करोड़, सहपऊ में 1.68 करोड़, सासनी में 84.28 लाख, हसायन में 1.81 करोड़, मुरसान में 1.19 करोड़, सिकंदराराऊ में 1.05 करोड़ और हाथरस में करीब 1.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। कुरसंडा, कंजौली, कजरौटी, उघैना, महरारा, सिरखरा, नगला गढ़ू, खेड़ा सुल्तानपुर, नगरिया पट्टी देवरी, धात्रा खुर्द, गोजिया और लहरा समेत अन्य गो-आश्रय स्थलों पर आवश्यकता के अनुसार निर्माण एवं विकास कार्य कराए जाएंगे।
गोशालाओं को केवल खर्च आधारित व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इसके लिए गोबर से लट्ठे, वर्मी कंपोस्ट और बायोगैस तैयार करने के साथ दुग्ध उत्पादन तथा उपयुक्त स्थानों पर मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से आय के स्रोत विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा गोवंश के लिए पर्याप्त भूसा और हरा चारा उपलब्ध कराने, केयरटेकर की तैनाती, शत-प्रतिशत ईयर टैगिंग तथा नर गोवंश का बधियाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। गो-आश्रय स्थलों के विकास के लिए प्रस्तावित बजट के अतिरिक्त सीएसआर के माध्यम से भी धनराशि खर्च करने की योजना है। जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ वित्तीय मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि चयनित गो-आश्रय स्थल आने वाले समय में अधिक क्षमता वाले, सुरक्षित और आत्मनिर्भर केंद्रों के रूप में विकसित हों।













