
हाथरस 29 अगस्त । जिले में सरकारी वाहनों से जुड़े सड़क हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सरकारी वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 15 दिन के अंतराल में सरकारी अधिकारियों से जुड़े दो अलग-अलग सड़क हादसों में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो लोग घायल हुए हैं। एक हादसे में नायब तहसीलदार की सरकारी गाड़ी की टक्कर से दादा-पोते समेत तीन लोगों की जान चली गई, जबकि दूसरे हादसे में जिला पूर्ति अधिकारी की सरकारी गाड़ी की टक्कर से एक मजदूर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। पहला हादसा मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाथरस जंक्शन कोतवाली क्षेत्र के गांव सलेमपुर के पास हुआ था। यहां नायब तहसीलदार की सरकारी गाड़ी ने बाइक को टक्कर मार दी थी। हादसे में गांव ठूलई निवासी सुभाष चंद्र (56) और उनके छह वर्षीय नाती दक्ष की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं गंभीर रूप से घायल सोनू (37) को उपचार के लिए अलीगढ़ रेफर किया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। बताया गया कि सुभाष चंद्र अपने नाती दक्ष को चाऊमीन खिलाकर बाइक से गांव लौट रहे थे। इसी दौरान सरकारी वाहन की चपेट में आने से दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे के बाद ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई थी और लोगों ने हंगामा करते हुए सड़क जाम कर दी थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली थी।
इस हादसे में जान गंवाने वाला सोनू एक होटल में काम करता था और अपने पीछे पांच बच्चों को छोड़ गया। वहीं मृतक सुभाष चंद्र के बेटे संदीप की तहरीर पर बोलेरो के अज्ञात चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। दादा और नाती के एक साथ अंतिम संस्कार से गांव में मातम छा गया था। बाद में घायल सोनू की मौत ने परिवार और ग्रामीणों के दुख को और बढ़ा दिया। अब बृहस्पतिवार रात हाथरस शहर में मथुरा रोड स्थित कलेक्ट्रेट के पास दूसरा सरकारी वाहन हादसा सामने आया। यहां बाइक सवार तीन मजदूरों को पीछे से आ रही जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) विकास गौतम की सरकारी गाड़ी ने टक्कर मार दी। मुरसान कोतवाली क्षेत्र के कथरिया गांव निवासी बनवारी लाल (60), रामप्रसाद (60) और रामगोपाल (50) एक ही बाइक से मजदूरी के सिलसिले में हाथरस आ रहे थे। कलेक्ट्रेट के पास सरकारी वाहन की टक्कर लगने से तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
राहगीरों की मदद से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर हालत को देखते हुए रामप्रसाद पुत्र डालचंद को आगरा रेफर किया गया, लेकिन आगरा ले जाते समय मध्यरात्रि में उनकी मौत हो गई। परिजन शव को वापस लेकर आए, जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे में घायल बनवारी लाल और रामगोपाल का उपचार कराया जा रहा है। वहीं DSO विकास गौतम के मुताबिक हादसे के समय वह सरकारी वाहन में मौजूद नहीं थे। उनके अनुसार, उनका चालक सरकारी गाड़ी लेकर घर जा रहा था। उन्होंने बताया कि मोड़ते समय बाइक सवार सरकारी वाहन से टकरा गए। हादसे के बाद घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। मृतक रामप्रसाद मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे और उनके पीछे छह संतानें हैं। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
करीब 15 दिन के भीतर सरकारी वाहनों से जुड़े दो हादसों में चार लोगों की मौत और दो लोगों के घायल होने के बाद अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी वाहनों के संचालन, चालकों की जिम्मेदारी, वाहन की गति, यातायात नियमों के पालन और अधिकारियों के सरकारी वाहनों के उपयोग की निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि दोनों हादसों में परिस्थितियां अलग-अलग बताई जा रही हैं और वास्तविक जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इन हादसों में जान गंवाने वाले लोग सामान्य परिवारों से थे और मेहनत-मजदूरी या छोटे रोजगार के जरिए अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे थे। ऐसे में सरकारी वाहनों से जुड़े सड़क हादसों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग महत्वपूर्ण हो जाती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन हादसों की जांच में क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में सरकारी वाहनों से होने वाली ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।













