
हाथरस 19 अगस्त। मानव कल्याण सामाजिक संस्था द्वारा ग्राम चिंतापुर में सर्वसुविधायुक्त एवं आधुनिक वृद्धाश्रम व अनाथालय का निर्माण कराया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य बेसहारा बुजुर्गों और अनाथ बच्चों को एक ही परिसर में परिवार जैसा आत्मीय वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां बुजुर्गों को बच्चों का सानिध्य और बच्चों को माता-पिता जैसा वात्सल्य, मार्गदर्शन एवं स्नेह मिल सके। संस्था के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय एवं मुख्य संरक्षक वरिष्ठ एडवोकेट राकेश बल्लभ ने बताया कि आश्रम का निर्माण आधुनिक तकनीकों और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आश्रम में दोनों पीढ़ियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को एक-दूसरे का साथ मिल सके और वे स्वयं को परिवार से जुड़ा महसूस करें। आश्रम परिसर में भव्य मंदिर एवं सत्संग भवन का भी निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा परिसर में बड़े स्तर पर पौधारोपण कर हरियाली विकसित की जाएगी। वृद्धजनों और बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए योगा सेंटर और फिटनेस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। साथ ही प्राकृतिक एवं आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
संस्था के जिला अध्यक्ष नारायण लाल, जिला महामंत्री कन्हैया वार्ष्णेय, जिला कोषाध्यक्ष लोकेश अग्रवाल, महिला जिलाध्यक्ष प्रगति वार्ष्णेय एवं महिला जिला कोषाध्यक्ष वर्षा वार्ष्णेय ने बताया कि आश्रम में बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की समुचित व्यवस्था की जाएगी। वहीं आश्रम को आत्मनिर्भर बनाने तथा निवासियों को स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से परिसर में लघु एवं कुटीर उद्योग भी स्थापित किए जाएंगे। आश्रम की कार्ययोजना के संबंध में जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र वार्ष्णेय, नगर अध्यक्ष नरेश अग्रवाल, नगर महामंत्री कृष्णगोपाल, नगर कोषाध्यक्ष पुनीत पोद्दार एवं युवा नगर अध्यक्ष कृष्णा शर्मा ने बताया कि परिसर की व्यवस्थाएं इस प्रकार विकसित की जा रही हैं, जिससे बुजुर्गों और बच्चों के बीच आत्मीय संबंध मजबूत हो सकें और दोनों पीढ़ियां एक-दूसरे के जीवन में सकारात्मक भूमिका निभा सकें। मानव कल्याण सामाजिक संस्था के पदाधिकारियों ने समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस पुनीत कार्य में सहयोग एवं सहभागिता की अपील की है। संस्था का मानना है कि यह पहल बेसहारा बुजुर्गों और अनाथ बच्चों को सुरक्षित आश्रय देने के साथ-साथ समाज में परिवार, सेवा, संस्कार और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।












