हाथरस 09 अगस्त। सावन कृपाल रूहानी मिशन के बैनर तले रविवार को मिशन की शाखा कृपाल आश्रम, गौशाला मार्ग हाथरस पर साप्ताहिक आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में ऑडियो-वीडियो के माध्यम से दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज एवं मिशन के प्रमुख और विश्व विख्यात आध्यात्मिक संत राजिंदर सिंह जी महाराज की पवित्र वाणी का श्रवण कराया गया। सत्संग के दौरान महाराज जी ने सृष्टि की रचना और मानव जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि परमात्मा ने इस सृष्टि की रचना क्यों की और मनुष्य के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के जीवों की रचना क्यों की गई। उन्होंने कहा कि सृष्टि के रहस्य को समझने की जिज्ञासा मनुष्य को आध्यात्मिक खोज की ओर ले जाती है। समय के साथ सृष्टि का विस्तार हुआ और परमात्मा की कृपा से संसार में समय-समय पर महापुरुषों का आगमन हुआ, जिन्होंने अपने निज अनुभवों के आधार पर परमात्मा के रहस्य को समझाया। महापुरुषों ने चौरासी लाख जीव योनियों के बारे में बताते हुए मानव योनि को सर्वश्रेष्ठ बताया, क्योंकि मनुष्य के पास ऐसे साधन और विवेक हैं, जिनके माध्यम से वह परमात्मा को जानने का प्रयास कर सकता है।
सत्संग में महाराज जी ने आगे बताया कि परमात्मा ने जब सृष्टि की रचना की तो उनके भीतर उठी एक हिलोर से दो शक्तियों का प्राकट्य हुआ, जिन्हें ज्योति और श्रुति के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही अनेक खंड-मंडलों की रचना हुई और उनमें निवास के लिए परमात्मा के मूल स्वरूप से अनेक आत्माओं की रचना हुई। उन्होंने समझाया कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान आत्मा परमात्मा की अनमोल देन है। इसी क्रम में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विद्यालय, निकट अनाज मंडी हाथरस से पहुंचीं बहन शांता कुमारी जी ने कबीर साहेब की वाणी “अव्वल अल्ला नूर उपाया, कुदरत के सब बंदे। एक नूर से सब जग उपजा, कौन भले कौन मंदे।” के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी मनुष्यों के भीतर एक ही शक्ति और एक ही नूर विद्यमान है, जिसे प्रभु की ज्योति, शब्द और नुक्ताए सवेदा आदि नामों से भी जाना जाता है। उन्होंने साध संगत को नशामुक्त भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करते हुए किसी भी प्रकार का नशा न करने का संकल्प भी दिलाया।
साप्ताहिक सत्संग के साथ शाखा हाथरस पर सामाजिक सेवा की विभिन्न गतिविधियां भी संचालित की गईं। छोटे बच्चों के लिए बाल सत्संग, गरीब एवं जरूरतमंद माताओं-बहनों तथा छात्र-छात्राओं के लिए निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्र और निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क एलोपैथिक, होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई, जहां अनुभवी एवं योग्य चिकित्सकों ने लोगों के स्वास्थ्य की जांच की तथा आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क दवाएं वितरित कीं। कार्यक्रम के अंत में साध संगत के लिए लंगर प्रसाद वितरित किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और प्रेमपूर्वक ग्रहण किया। आयोजन की सभी गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में मिशन के कर्मठ सेवादारों एवं शाखा हाथरस की प्रबंध समिति के सक्रिय सदस्यों का सराहनीय सहयोग रहा।











