मथुरा 30 जुलाई। प्रकृति हमारी विरासत ही नहीं बल्कि इसका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी भी है। प्रकृति हमें जीने के लिए हर संसाधन उपलब्ध कराती है। हम जंगलों, नदियों, वन्यजीवों और जैव-विविधता की रक्षा कर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरा-भरा और स्वच्छ-स्वस्थ भविष्य दे सकते हैं। यह सारगर्भित उद्गार मुख्य अतिथि डॉ. अनिल कुमार पटेल, आईएफएस, मुख्य वन संरक्षक आगरा सर्किल ने जी.एल. बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा के छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। जीएल बजाज के एप्लाइड साइंस और ह्यूमैनिटीज विभाग एवं एनवायरनमेंटल क्लब द्वारा आयोजित “प्रकृति संरक्षण” कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से कहा कि प्रकृति हमारे जीवन का सबसे बड़ा उपहार है लिहाजा हरी-भरी धरती और समृद्ध पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। डॉ. अनिल कुमार पटेल ने अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में प्रकृति संरक्षण के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से एशियाई शेरों के संरक्षण, तेंदुओं, वन्यजीवों के अवैध शिकार तथा घायल एवं विस्थापित वन्यजीवों के पुनर्वास से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
डॉ. पटेल ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही जैव विविधता का प्रभावी संरक्षण सम्भव है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम की मार्गदर्शक संस्थान की निदेशक प्रो. (डॉ.) नीता अवस्थी ने कहा कि आज दुनिया पर्यावरणीय संकट का सामना कर रही है। लगातार बढ़ता तापमान, जंगलों की कटाई, जल स्रोतों का प्रदूषण और जैव विविधता में कमी भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। प्रो. अवस्थी ने कहा कि विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस हमें यह संदेश देता है कि यदि समय रहते प्रकृति की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
विभागाध्यक्ष प्रो. वी.के. सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण आज केवल एक पर्यावरणीय विषय नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व से जुड़ा वैश्विक दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण के प्रति संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. वजीर सिंह, सहायक आचार्य, एप्लाइड साइंस एंड ह्यूमैनिटीज विभाग ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। संयोजक डॉ. वज़ीर सिंह ने विद्यार्थियों से पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश फैलाने का आग्रह किया। इस अवसर पर पर्यावरण क्लब के समन्वयक इंजीनियर सतेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया तथा संस्थान द्वारा संचालित पर्यावरणीय गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने कॉलेज परिसर में पौधरोपण कर प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा स्वच्छ एवं हरित भारत के निर्माण के लिए सक्रिय योगदान देने की शपथ ली। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।






