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सिकन्दराराऊ (हसायन) 28 जुलाई। ब्लॉक संसाधन केंद्र एवं खंड शिक्षाधिकारी के कार्यालय के सभागार परिसर में आज अठ्ठाइस जुलाई को बेसिक शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन के आदेश पर परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग छात्र छात्राओ के दिव्यांगता मापन शिविर का आयोजन किया गया।दिव्यांगता मापन शिविर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा समग्र शिक्षा निपुण भारत समग्र शिक्षा के समेकित शिक्षा के अन्तर्गत विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के मेडिकल एसेसमेंट शिविर कैंप का आयोजन किया गया।शिविर में बाइस छात्र छात्राओ में से महज बीस छात्र छात्राओ का चयन किया गया।दिव्यांगता वाले छात्र छात्राओ के शिविर में सुबह दस बजे से दिव्यांग छात्र छात्रा व उनके अभिभावक मेडिकल दिव्यांग बोर्ड टीम के चिकित्सक सदस्यों के आने का इंतजार करते हुए दिखाई दिए।शिविर में स्पेशल एजूकेटर प्रदीप कुमार व रामजीलाल के द्वारा शिविर में आए मौजूद छात्र छात्राओ का पंजीकरण कर आधार कार्ड की छायाप्रति जमा कराकर पंजीकरण किया गया।दोपहर बारह बजे दिव्यांग बोर्ड की टीम जिला चिकित्सालय से आर्थो हड्डी रोग विशेषज्ञ विभाग से डाॅ.पवन राजपूत व मानसिक विभाग से डाॅ.ललित कुमार के साथ चार सदस्यीय स्वास्थ्य चिकित्सक टीम के सदस्य दिखाई दिए।दिव्यांग छात्र छात्राओं के अंग मापककार्य के लिए भेजे गए दिव्यांग मेडिकल बोर्ड के सदस्यो के द्वारा दो जन्मजात पैर व हाथ से विकृत दिव्यांग होने के बा भी चिकित्सकों की टीम ने बच्चों के खानपान पर ध्यान देने की बात कहते मापन किए जाने से इंकार कर ए.डी.ऑयल कागज पर लिखकर दिव्यांग छात्र के पिता को देते हुए बिना दिव्याग मापन किए बिना ही बापिस कर दिया।चिकित्सक के द्वारा दिव्यांगता का मापन करने से इंकार करने पर छात्र का पिता हताश होकर अपने दिव्यांग बच्चे को लेकर बापिस चला गया।दिव्यांगता शिविर के दौरान हड्डी रोग विशेषज्ञ विभाग से आए चिकित्सक डाॅ.पवन राजपूत दिव्यांग छात्र की दिव्यांगता का मापन करते वक्त दिव्यांग छात्र के पिता से यह कहते हुए दिखाई व सुनाई पडे कि वह बच्चे को ड्राई फ्रूट मेवा खिलाकर उसकी सही से देखभाल करे यह कहते हुए उन्होने छात्र का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जाने से इंकार करते हुए कह दिया कि वह अगले वर्ष मापन शिविर में फिर माप करा सकते है।चिकित्सक के द्वारा जन्मजात मनोरोग एवं दिव्यांगता से पीडित छात्र के पिता चिकित्सक से यह कहते हुए सुनाई दिए कि वह खानपान के अलावा मालिस व फिजियोथिरैपी कराए जाने के बाद जयपुर सहित विभिन्न जगहो पर बच्चे का उपचार करा चुके है।मगर इतने शब्द सुनने के बाद भी चिकित्सक ने जन्मजात दिव्यांग छात्र का मापन करना भी जरूरी नही समझा।दिव्यांग छात्र के पिता हड्डी रोग विशेषज्ञ विभाग के डाॅ पवन राजपूत की बातें सुनकर हताश होकर बच्चे को लेकर चला गया।इस संबंध में डाॅ.पवन राजपूत से बातचीत करने पर बताया कि अरे नही नही उसमें है नही,वो बच्चा है न उसकी मैने हाथ वाथ सब देख लिया वह बनने लायक नही है,हाथ वाला बच्चा जब रिपोर्टर ने पूछा कि हाथ वाला नही पैर में दिव्यांगता तो वाला बच्चा तो चिकित्सक दूरभाष पर दिव्यांग छात्र के दिव्यांगता मापन नही किए जाने व दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए चयनित नही किए जाने के बारे में जानकारी की तो चिकित्सक सफाई देते यह कहते सुनाई पडे कि नही नही सुनो सुनो मेरी बात  सुनो तो सही उसके पैर में वैसी प्राब्लम नही है।जैसे पोलियो होता है न पोलियो है न पैरालाइसिस है,उस टाइप की नही है उसको खाने पीने की थोडी कमी है।मैने उसे आयल भी लिखकर दिया है।जब रिपोर्टर ने कहा कि बच्चा तो जन्मजात दिव्यांग है,इस पर चिकित्सक बोले कि भारत सरकार की जो गाइडलाइंस दे रखी है,दो सौ पन्नो की किताब है वो अब हम किसी का गलत तरीके से नही बना सकते है,अगर वो कैटेगरी में आ रहा है तो ही बनेगा,पोलियो हमारे देश से खत्म हो चुका है,जब चिकित्सक से पूछा गया कि पोलियो भले ही खत्म हो गया है,मगर जो जन्मजात दिव्यांग है,उसके पैर में पाॅवर कम है,उसके पैर में इतनी पाॅवर कम नही है कि उसका सर्टीफिकेट बने मैने तभी तो उससे कहा है कि भाई पहले एक दो साल खाना पीना अच्छे से दो,अगर फिर भी होता है तो हर साल यह कैंप लगता है अगर कुछ बढेगा तो ही हम बनाएगें।लेकिन वह उसकी कैटेगिरी में नही आ रहा है।सालभर में बढता है तो बनेगा अगर खान-पान व आयल के प्रयोग से सही हो जाता है तो सही रहेगा।

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