मथुरा 28 जुलाई। केडी विश्वविद्यालय के चिकित्सा शिक्षा संस्थान केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में नशा मुक्ति जागरूकता सप्ताह का शुभारम्भ कॉलेज के डीन एवं प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू पांडेय, मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव सिंह, डॉ. जयेश सहित अन्य शिक्षकों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने मादक पदार्थों, तम्बाकू, सिगरेट तथा अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ ली।
इस अवसर पर डॉ. आर.के. अशोका ने विद्यार्थियों को मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए कहा कि नशे की प्रवृत्ति व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार और सामाजिक जीवन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालती है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने मादक पदार्थों के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों, कानूनी परिणामों तथा समय रहते परामर्श एवं उपचार की आवश्यकता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
मनोचिकित्सक डॉ. श्वेता सिंह ने कहा कि नशा मुक्ति जागरूकता सप्ताह का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना और समाज में व्यापक जनजागरूकता पैदा करना है। उन्होंने युवाओं में बढ़ते मादक द्रव्यों के सेवन को चिंता का विषय बताते हुए इस चुनौती से निपटने के लिए जागरूकता, सतर्कता और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं से सोच-समझकर निर्णय लेने और नशामुक्त समाज के प्रेरक बनने का आग्रह किया।कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों एवं मेडिकल छात्र-छात्राओं ने एक प्रभावशाली लघु नाटक प्रस्तुत कर नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान को जीवंत रूप से दर्शाया। नाटक का मंचन डॉ. प्रगति सिंह, डॉ. देवांशी, डॉ. परिमिता, दीपाली, सलोनी डोगरा, संध्या कुमारी, डॉ. आयुष नागल, डॉ. आर्यन चौधरी, डॉ. अमन शर्मा, डॉ. रोनित सिंह एवं अभय तोमर सहित अन्य प्रतिभागियों ने किया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से पधारीं बहन बी.के. ज्योत्सना ने अपने संबोधन में कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शरीर और मन को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, करियर और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन और सकारात्मक सोच का अभ्यास मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है, जिससे व्यक्ति नशे जैसी बुरी आदतों और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रह सकता है। उन्होंने युवाओं से स्वस्थ एवं व्यसन-मुक्त जीवनशैली अपनाकर सशक्त और विकसित राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने नशामुक्त जीवनशैली अपनाने तथा समाज में जनजागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया।







