सासनी 27 जुलाई। सासनी क्षेत्र स्थित गोहाना चौकी के निकट रोशन फार्म हाउस में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रवीण कुमार धनगर के नेतृत्व में आयोजित इस गोष्ठी में दिल्ली और हाथरस से आए कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने सैकड़ों किसानों को आधुनिक खेती, मृदा स्वास्थ्य और उन्नत कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। गोष्ठी में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई), नई दिल्ली के एग्रोनॉमी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय सिंह राठौर, प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. राजीव कुमार सिंह, सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सुभाष बाबू तथा टेक्निकल ऑफिसर मुकेश कुमार यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संजीव कुमार उर्फ भोला सूर्यवंशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने बताया कि यह गोष्ठी एक कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) परियोजना के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों से अवगत कराना और उन्हें टिकाऊ कृषि के लिए प्रेरित करना है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को डीएपी और यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता और फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक खाद एवं वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) का अधिक से अधिक उपयोग करने की सलाह दी, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके।
गोष्ठी में किसानों को गोबर से वर्मीकंपोस्ट तैयार करने, उन्नत बीजों के चयन, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा वैज्ञानिक खेती के तरीकों की भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इस परियोजना के तहत किसानों को नियमित प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।आयोजकों के अनुसार, इस सीएसआर परियोजना के अंतर्गत अब तक चार राज्यों में लगभग 30 किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें से करीब 15 गोष्ठियां उत्तर प्रदेश में आयोजित हुई हैं। उन्होंने बताया कि सासनी में मिली सफलता के बाद जल्द ही एक विशाल किसान मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 1,000 से अधिक किसानों को आमंत्रित करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ उठा सकें।








