
लखनऊ 20 जुलाई। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने डुप्लीकेट नाम हटाने का विशेष अभियान शुरू कर दिया है। अभियान के तहत एक ही व्यक्ति के नाम यदि एक से अधिक स्थानों या अलग-अलग वोटर आईडी (EPIC) नंबरों पर दर्ज हैं, तो सत्यापन के बाद अतिरिक्त प्रविष्टियों को हटाया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने बूथ एवं विधानसभा क्षेत्रवार उपलब्ध ऑनलाइन डेटा का विश्लेषण कर ऐसे मतदाताओं की पहचान की है, जिनके नाम, माता-पिता के नाम और पते में समानता पाई गई है। इस कार्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भी सहायता ली गई है। समान विवरण वाले मतदाताओं के क्लस्टर तैयार कर संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को उपलब्ध करा दिए गए हैं। निर्देशों के अनुसार, बीएलओ अपने-अपने क्षेत्र में जाकर इन मामलों का भौतिक सत्यापन करेंगे और 31 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। यदि किसी मतदाता का नाम एक ही बूथ या अलग-अलग बूथों पर एक से अधिक बार दर्ज पाया जाता है, तो उससे उसकी वास्तविक निवास स्थिति की पुष्टि की जाएगी। मतदाता की सहमति के आधार पर केवल एक स्थान पर नाम रखा जाएगा और शेष स्थानों से नाम हटाने की संस्तुति की जाएगी। निर्वाचन आयोग के अनुसार, जैसे ही बीएलओ संस्तुति करेंगे, नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 स्वतः तैयार हो जाएगा। इसके बाद बीएलओ को उस फॉर्म पर अपनी रिपोर्ट दर्ज करनी होगी, जिसके आधार पर डुप्लीकेट नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। गौरतलब है कि 10 अप्रैल को प्रकाशित विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के तहत उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची में 13.39 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। जांच में सामने आया है कि अनेक मतदाताओं के नाम अब भी एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं या उन्हें अलग-अलग EPIC नंबर जारी हो चुके हैं। हालांकि निर्वाचन आयोग ने अभी प्रदेश में डुप्लीकेट मतदाताओं की कुल संख्या सार्वजनिक नहीं की है। आयोग का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्पष्ट आंकड़े सामने आ सकेंगे।








