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सिकन्दराराऊ (हसायन) 20 जुलाई। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गांव सलेमपुर के मजरा जैतपुर में स्थित दिव्य योग कला मंदिर में गुप्त नवरात्र महोत्सव के अंतर्गत आषाढ़ शुक्ल पक्ष षष्ठी के अवसर पर सोमवार को परम पूज्य श्री श्री 1008 कलाधर जी महाराज के पावन सान्निध्य में एक दिवसीय भव्य धार्मिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर सत्संग का पुण्य लाभ प्राप्त किया। सत्संग को संबोधित करते हुए कलाधर जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर की भक्ति एवं नाम-स्मरण है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रसिद्ध चौपाई— “बारि मथें घृत होइ बरु, सिकता ते बरु तेल। बिनु हरि भजन न भव तरिअ, यह सिद्धांत अचेल॥” का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी मथने से घी और रेत से तेल निकलना असंभव है, उसी प्रकार प्रभु भजन के बिना इस संसार रूपी भवसागर से पार पाना भी संभव नहीं है। यह सनातन एवं अटल सत्य है। उन्होंने कहा कि “जो सुख सत्संग में है, वह बैकुंठ में भी दुर्लभ है।” इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन भगवान के नाम का जप करना चाहिए। श्रावण मास के आगमन का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रातः एवं सायंकाल भगवान शिव के नाम का स्मरण, पूजा-अर्चना एवं साधना करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। कलाधर जी महाराज ने कहा कि सावन का पावन महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में भक्ति, साधना और संयम का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव और सद्गुरु ही ऐसे हैं, जो बिना किसी भेदभाव के सभी पर समान रूप से अपनी कृपा बरसाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने सांसारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए योग, साधना और प्रभु भक्ति को जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। सत्संग के समापन पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन एवं गुरु वंदना में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया तथा धर्म, सेवा और सदाचार के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

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