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सिकन्दराराऊ (पुरदिलनगर) 18 जुलाई। सरस्वती विद्या मन्दिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पुरदिलनगर में संकुल स्तरीय शिशुवाटिका वर्ग का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। आयोजित प्रशिक्षण वर्ग में संकुल के आठ विद्यालयों से आए शिशुवाटिका आचार्य एवं आचार्याओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों की बारीकियों को जाना। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रशिक्षक श्रीमती ऊषा पुन्ढीर द्वारा माँ सरस्वती एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिशुवाटिका शिक्षण की 12 व्यवस्थाओं, बाल-केंद्रित गतिविधियों, गीत, खेल, कहानी, संस्कार निर्माण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रभावी शिक्षण पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही व्यवहारिक एवं क्रियात्मक प्रदर्शन के माध्यम से शिशुओं के सर्वांगीण विकास के विभिन्न आयामों पर भी प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य हरीशंकर शर्मा ने कहा कि शिशुवाटिका शिक्षा बालक के व्यक्तित्व निर्माण की सुदृढ़ नींव है। ऐसे प्रशिक्षण वर्ग शिक्षकों की कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ-साथ विद्यालयों में संस्कारयुक्त, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी शिक्षण वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा जितनी मजबूत होगी, बच्चों का भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा। समापन सत्र में प्रधानाचार्य ने सभी प्रतिभागी आचार्य-आचार्याओं एवं प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए आह्वान किया कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं नवीन शिक्षण तकनीकों को अपने-अपने विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करें, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर एवं संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान की जा सके। कार्यक्रम में राकेश कुमार, राजन सिंह, शिशुपाल सिंह, हरपाल सिंह, राजवीर शर्मा, प्रवीन कुमार सहित अनेक आचार्य एवं शिक्षण कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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