
हाथरस 18 जुलाई। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों एवं जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय के आदेशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनु चौधरी ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) कार्यालय एवं न्यायालय कक्ष का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों से जुड़े मामलों की समीक्षा करना तथा उन्हें उपलब्ध कराई जा रही विधिक सहायता एवं सुविधाओं का जायजा लेना था। निरीक्षण के दौरान सचिव ने बाल कल्याण समिति के समक्ष विचाराधीन विभिन्न मामलों की पत्रावलियों एवं कार्यालय अभिलेखों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों से बच्चों के पुनर्वास, गोद लेने की प्रक्रिया तथा संरक्षण गृहों में भेजे गए बच्चों की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की। सचिव अनु चौधरी ने निर्देश दिए कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों, विशेषकर लावारिस, पीड़ित एवं शोषित बच्चों से जुड़े प्रकरणों का निर्धारित समय सीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी बच्चे का भविष्य प्रभावित न हो। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में आने वाले बच्चों एवं उनके परिजनों के लिए उपलब्ध बैठने की व्यवस्था, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी निरीक्षण किया गया। सचिव ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी पीड़ित बच्चे या उसके परिवार को कानूनी सहायता अथवा अधिवक्ता की आवश्यकता हो, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उन्हें तत्काल निःशुल्क विधिक सहायता एवं काउंसिलिंग उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल देते हुए कहा कि इससे पीड़ित बच्चों को समय पर न्याय एवं पुनर्वास का लाभ मिल सकेगा। साथ ही समिति को बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति के विरुद्ध भी सक्रिय रूप से अभियान चलाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष बबीता अग्रवाल, सदस्य मनोज कुमार शर्मा, विनोद कुमार चौधरी, भानुप्रताप सिंह एवं अनुपमा शर्मा, चाइल्ड हेल्पलाइन के काउंसलर सुमित कुमार उपाध्याय सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।





