
हाथरस 13 जुलाई। जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच सर्पदंश की घटनाओं में तेजी देखने को मिल रही है। शनिवार देर शाम से रविवार सुबह तक बांग्ला संयुक्त जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में सर्पदंश के 14 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। सभी मरीजों को चिकित्सकीय परीक्षण के बाद आवश्यकता अनुसार एंटी स्नेक वेनम (एंटी वेनम) दिया गया, जिससे उनकी स्थिति में सुधार हुआ। कुछ मरीज ऐसे भी थे, जिनमें सर्पदंश का संदेह था, लेकिन विष के लक्षण नहीं पाए गए। हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव जलालपुर निवासी चार वर्षीय गणेश घर के आंगन में खेल रहा था, तभी झाड़ियों में छिपे सांप ने उसके पैर पर काट लिया। बच्चे के पिता नरेंद्र मोहन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान एंटी वेनम दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार बच्चा अब खतरे से बाहर है। वहीं, चिंतागढ़ी निवासी अंशु को शनिवार रात जमीन पर सोते समय सांप ने डस लिया। पैर में तेज दर्द और जलन महसूस होने पर परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। इसी प्रकार सासनी क्षेत्र के गांव जिरौली निवासी प्रियंका, पत्नी कुलदीप, को घर में काम करते समय सांप ने काट लिया। इसके अलावा सादाबाद के शिवम और संजय, वीर नगर के नीरज, खोरना निवासी कान्हा, खोड़ा रति के मनीष, दरियापुर के प्रशांत, भूडरी (मुरसान) के अमन, वनगढ़ के हरिशंकर तथा रुहेरी निवासी हरिश्चंद्र भी सर्पदंश के बाद उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सूर्य प्रकाश ने बताया कि पिछले 24 घंटे के दौरान सर्पदंश के मरीजों के उपचार में 32 एंटी स्नेक वेनम शीशियों का उपयोग किया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें और मरीज को तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाएं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं ‘बिग फोर’ जहरीले सांप
चिकित्सकों के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस, अलीगढ़, मथुरा, आगरा सहित मैदानी क्षेत्रों में मुख्य रूप से चार अत्यधिक विषैले सांप पाए जाते हैं, जिन्हें चिकित्सा विज्ञान में ‘बिग फोर’ कहा जाता है। इनमें कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। इन चारों सांपों के विष के प्रभाव को निष्क्रिय करने के लिए पॉलीवेलेंट एंटी स्नेक वेनम दवा का उपयोग किया जाता है, जो सर्पदंश के उपचार में प्रभावी मानी जाती है।











