
हाथरस 10 जुलाई । जिलाधिकारी अतुल वत्स ATUL VTAS ने आज नेशनल हाईवे आगरा-अलीगढ़ मार्ग पर हतीसा बाईपास से नगला भुस तक विकसित की जा रही कॉलोनियों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्धारित मानकों एवं नियमों का पालन न मिलने पर उन्होंने संबंधित कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी करने तथा नियमानुसार सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण में पाया गया कि कई कॉलोनियों के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्वीकृत मानचित्र, आवश्यक अभिलेख एवं अनुमतियों का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया गया है, जिससे आम नागरिकों के गुमराह होने की आशंका है। इस पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी एवं विनियमित क्षेत्र के अधिकारियों को तत्काल जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि कोई कॉलोनी बिना स्वीकृत लेआउट के विकसित की जा रही है अथवा नेशनल हाईवे से प्रवेश मार्ग के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) या अन्य सक्षम प्राधिकारी की वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) उपलब्ध नहीं है, तो उसके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। आवश्यकता पड़ने पर ऐसी अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी अमल में लाई जाए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की जीवनभर की जमा पूंजी की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी व्यक्ति को भ्रामक जानकारी देकर या नियमों का उल्लंघन करते हुए भूखंडों की बिक्री करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे मामलों में दोषी कॉलोनाइजरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में कॉलोनियों के लेआउट स्वीकृत करने का अधिकार केवल जिला पंचायत क्षेत्र अथवा विनियमित क्षेत्र (नियत प्राधिकारी कार्यालय) को ही प्राप्त है। किसी भी कॉलोनी का विकास करने से पहले संबंधित कॉलोनाइजर के लिए सक्षम प्राधिकारी से लेआउट एवं मानचित्र की स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक कॉलोनाइजर स्थल पर स्वीकृत लेआउट, स्वीकृत मानचित्र संख्या तथा कॉलोनी में उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं, जैसे सड़क, विद्युत, पेयजल, सीवर एवं अन्य अधोसंरचना संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें, ताकि भूखंड खरीदने वाले नागरिकों को सही एवं पारदर्शी जानकारी मिल सके। जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि किसी भी कॉलोनी में भूखंड खरीदने से पहले उसका स्वीकृत लेआउट, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, एनओसी एवं अन्य आवश्यक अभिलेखों का सत्यापन अवश्य कर लें, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी परेशानी या आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
























