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हाथरस 30 जून। व्यक्ति के मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्यरत एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स (ADHR) द्वारा अज्ञात एवं लावारिस शवों के धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करने का सामाजिक कार्य लगातार किया जा रहा है।

इसी क्रम में सादाबाद कोतवाली क्षेत्र के बिसावर चौकी अंतर्गत गढ़ी गुमानी के बंबा में 27 जून को एक अज्ञात शव बहता हुआ मिला। शव नग्न अवस्था में था तथा अत्यधिक सड़-गल जाने और फूल जाने के कारण केवल ढांचा ही शेष रह गया था। पोस्टमार्टम के दौरान शव की पहचान महिला या पुरुष के रूप में भी नहीं हो सकी। चिकित्सकों द्वारा विसरा सुरक्षित रख लिया गया है, जिसे डीएनए जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच के बाद मृतक के महिला या पुरुष होने तथा उसकी आयु संबंधी जानकारी मिलने की संभावना है। पुलिस द्वारा शव की शिनाख्त के लिए 72 घंटे तक प्रयास किए गए, लेकिन पहचान नहीं होने पर शव को लावारिस घोषित करते हुए पोस्टमार्टम कराया गया। इसके उपरांत पुलिस ने समाजसेवी सुनीत आर्य एवं प्रवीन वार्ष्णेय से अंतिम संस्कार कराने का अनुरोध किया। एडीएचआर की देखरेख में समाजसेवी सुनीत आर्य के नेतृत्व में अज्ञात शव का हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विधिवत दाह संस्कार किया गया। इस कार्य में एडीएचआर के उपाध्यक्ष हर्ष मित्तल (पिंटू) का विशेष सहयोग रहा। अंतिम संस्कार के दौरान एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय, समाजसेवी सुनीत आर्य, एनएसएस अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, आयोग दीपक, बंटी भाई (कपड़े वाले), तरुण राघव, विशाल सोनी, सतेन्द्र मोहन, दीपांशु वार्ष्णेय, कांस्टेबल संदीप कुमार तथा कांस्टेबल अमन कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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