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मथुरा 30 जून। राजीव इंटरनेशनल स्कूल में साइबर सिक्योरिटी तथा छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य विषय पर आयोजित कार्यशाला में साइबर अपराध अन्वेषकों विवेक गिरी, राजवर्धन पुरोहित, रामप्रकाश देशवाल तथा विवेक कुमार सिंह ने शिक्षक-शिक्षिकाओं से अपने-अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला का शुभारम्भ प्राचार्या नंदिता ढींगरा ने विद्या की आराध्य देवी मां सरस्वती पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एज्यूकेशन नोएडा द्वारा साइबर सिक्योरिटी विषय पर आयोजित कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम में एमिनेंट स्पीकर्स ने सभी टीचर्स को बढ़ते साइबर हमलों तथा उनसे बचने के उपाय बताए। विशेषज्ञों ने साइबर स्पेस के मूलभूत नियमों की व्याख्या करते हुए जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, मजबूत पासवर्ड बनाने, सोशल मीडिया तथा डिजिटल भुगतान प्लेटफार्मों का उपयोग करते समय सावधानी बरतने पर जोर दिया। कार्यशाला में शिक्षकों को सलाह दी गई कि वे किसी भी गोपनीय जानकारी का जवाब देने या साझा करने से पहले अज्ञात लिंक, ईमेल, अटैचमेंट, क्यूआर कोड और फोन कॉल को सत्यापित जरूर करें वरना वित्तीय सम्पदा और प्रतिष्ठा को गम्भीर नुकसान हो सकता है। कार्यशाला में साइबर सेफ्टी एंड सिक्योरिटी, साइबर एथिक्स से जुड़ी समस्याएं, बैंक फ्रॉड, इनफार्मेशन ऑफ़ टेक्नोलॉजी एक्ट, कम्प्यूटर फोरेंसिक जैसे विषयों पर सभी टीचर्स के साथ संवाद स्थापित करते हुए विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण डिजिटल सुरक्षा उपकरणों तथा प्लेटफार्मों से भी परिचित कराया।

कार्यशाला में शिक्षक-शिक्षिकाओं को छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने की भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने गुरुजनों को छात्र-छात्राओं का विश्वास जीतकर उन्हें डिप्रेशन में न जाने देने के गुर बताए। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि हम विद्यार्थियों पर थोड़ा ध्यान दें, उनका विश्वास जीतें तो बढ़ते हुए आत्महत्या के मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यशाला में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से महत्वपूर्ण विषयों को समझाया गया। प्राचार्या नंदिता ढींगरा ने अतिथि वक्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को उभरते साइबर खतरों के प्रति जागरूक करना, उन्हें व्यक्तिगत, व्यावसायिक दोनों स्तरों पर डिजिटल प्लेटफार्मों के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करना था। यह कार्यशाला ज्ञानवर्धक, व्यावहारिक और आज के डिजिटल युग में अत्यंत प्रासंगिक थी। सभी टीचर्स ने कार्यशाला में उत्साहपूर्वक प्रतिभागिता की तथा विभिन्न सवालों के जवाब प्राप्त कर अपनी जिज्ञासा को शांत किया। स्कूल के चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि ऐसी कार्यशालाओं से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। कार्यशाला में बताए गए सुझावों पर अमल कर शिक्षक-शिक्षिकाएं अपने सिस्टम नेटवर्क और प्रोग्राम को डिजिटल नुकसान से बचा सकते हैं।

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