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मथुरा 20 जून । केडी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर अपनी चिकित्सा सुविधाओं में लगातार इजाफा कर रहा है। इसी कड़ी में हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक 32-चैनल ईईजी (इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी) मशीन का शुभारम्भ किया गया। यह उन्नत तकनीक मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों का अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर अध्ययन करने में सक्षम है, जिससे मिर्गॉ सहित विभिन्न न्यूरोलॉजिकल रोगों का अधिक सटीक एवं शीघ्र निदान सम्भव हो सकेगा। जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू पांडेय ने बताया कि सामान्यतः अधिकांश अस्पतालों में 16-चैनल ईईजी मशीनें उपलब्ध होती हैं, लेकिन के.डी. हॉस्पिटल में 32-चैनल ईईजी मशीन का संचालन शुरू कर दिया गया है। यह मशीन मस्तिष्क की गतिविधियों को दोगुनी क्षमता के साथ रिकॉर्ड करती है। इससे मस्तिष्क के प्रभावित हिस्सों की पहचान अधिक सटीकता से की जा सकेगी तथा जटिल मामलों के निदान में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

डॉ. पांडेय ने बताया कि कई बार मिर्गी के दौरे बहुत सूक्ष्म रूप में दिखाई देते हैं, जैसे केवल आंख झपकना, नींद के दौरान असामान्य गतिविधियां होना या शरीर के किसी एक हिस्से में बार-बार हलचल होना। ऐसे मामलों में मरीज और परिजन बीमारी को समझ नहीं पाते, जबकि यह स्थिति मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। नई ईईजी तकनीक ऐसे छिपे हुए दौरों की पहचान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विभागाध्यक्ष डॉ. पांडेय ने समाज में व्याप्त भ्रांतियों पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी कई लोग मिर्गी को भूत-प्रेत या अंधविश्वास से जोड़ते हैं, जबकि यह एक चिकित्सकीय समस्या है जिसका वैज्ञानिक जांच और उचित उपचार उपलब्ध है। समय पर जांच और उपचार से मरीज सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी सकता है। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि कई बार सामाजिक कारणों से महिलाओं की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर हो जाती है। समय पर निदान एवं उपचार से ऐसे मरीजों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

डॉ. बी. गोस्वामी (डीएम न्यूरोलॉजी) ने बताया कि के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर पूरे मथुरा जनपद का एकमात्र संस्थान है, जहां 32-चैनल ईईजी, आईसीयू ईईजी मॉनिटरिंग एवं स्लीप लैब स्टडी जैसी अत्याधुनिक न्यूरोलॉजिकल जांच सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। इन जांचों के माध्यम से मिर्गी, बेहोशी, बार-बार आने वाले दौरे, नींद संबंधी विकारों, स्लीप एपनिया तथा अन्य जटिल मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र की बीमारियों का सटीक निदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि मिर्गी कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है जोकि समय पर जांच और उपचार से ठीक हो जाती है। डॉ. गोस्वामी ने कहा कि संस्थान के चेयरमैन श्री मनोज अग्रवाल के प्रयासों से हॉस्पिटल में आधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों के संयोजन से मरीजों को उच्चस्तरीय न्यूरोलॉजिकल सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। विशेष बात यह है कि ये सभी जांच सुविधाएं मरीजों को अत्यंत किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के अधिक से अधिक मरीज आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें। टेक्नीशियन सचिन सिन्हा ने 32-चैनल ईईजी मशीन के संचालन की जानकारी दी। के.डी. हॉस्पिटल प्रबंधन ने क्षेत्रवासियों से मिर्गी, बार-बार बेहोशी, नींद संबंधी समस्याओं अथवा अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर आधुनिक जांच सुविधाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया है।

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