
हाथरस 13 जून । नगर पंचायत सासनी की सीवरेज एवं जल निकासी योजना में हुए कथित वित्तीय घोटाले के मामले में जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट भ्रष्टाचार निवारण संगठन (विजिलेंस), लखनऊ को भेज दी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद अब मामले में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की संभावना बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार राज्य दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के सदस्य एवं शिकायतकर्ता सागर शर्मा ने 10 अप्रैल को आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत का संज्ञान लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन (विजिलेंस), लखनऊ ने 30 अप्रैल को जिलाधिकारी हाथरस से मामले में विधिक कार्रवाई एवं भ्रष्टाचार के तत्वों की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा था। इसके क्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा 4 जून को विजिलेंस को विस्तृत जांच आख्या भेजी गई। जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय संयुक्त जांच समिति, जिसमें एसडीएम सासनी, वरिष्ठ कोषाधिकारी एवं जल निगम के अधिशासी अभियंता शामिल थे, ने अपनी जांच में पाया कि मेसर्स दुबे एंटरप्राइजेस द्वारा जमा की गई एफडीआर पूरी तरह फर्जी थी। इसकी पुष्टि भारतीय स्टेट बैंक, अलीगढ़ द्वारा लिखित रूप से की गई। जांच में यह भी सामने आया कि 130 मीटर खुदाई के कार्य को कागजों में बढ़ाकर 230 मीटर दर्शाया गया और उसके आधार पर फर्जी भुगतान कर फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच समिति ने प्रथम दृष्टया तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ), जूनियर इंजीनियर (जेई) तथा लिपिक को अनियमितताओं का जिम्मेदार माना है। यह रिपोर्ट पहले ही स्थानीय निकाय निदेशालय, लखनऊ को भेजी जा चुकी है। इसके साथ ही मुख्य आरोपी बताए जा रहे जेई के स्थानांतरण की सूचना भी विजिलेंस को उपलब्ध करा दी गई है। संबंधित जेई की तैनाती नगर पालिका परिषद हाथरस में थी और जिले में एकमात्र जेई होने के कारण वह अन्य निकायों का कार्य भी देख रहे थे। उनका स्थानांतरण अब चंदौली जनपद में कर दिया गया है। मामले में विजिलेंस की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।


























