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हाथरस 10 जून। मौसम की मार इस बार मक्का किसानों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। बारिश के डर से किसानों ने फसल की समय से पहले कटाई तो कर ली, लेकिन अधिक नमी होने के कारण मंडियों में उन्हें उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। नतीजतन किसान अपनी उपज औने-पौने भाव में बेचने को मजबूर हैं। आखिर क्या है किसानों की परेशानी, देखिए यह रिपोर्ट।

मौसम में बदलाव और बारिश की आशंका के चलते किसानों ने इस वर्ष मक्का की फसल समय से पहले काट ली। हालांकि फसल को संभावित नुकसान से बचाने के लिए उठाया गया यह कदम अब किसानों के लिए आर्थिक चिंता का कारण बन गया है। खेतों से जल्द निकाली गई मक्का में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण मंडियों और खरीद केंद्रों पर किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम और बारिश की संभावना को देखते हुए उन्होंने फसल को खेतों में खड़ा रखने का जोखिम नहीं उठाया। लेकिन समय से पहले कटाई होने से मक्का पूरी तरह सूख नहीं सकी, जिसके कारण दानों में नमी अधिक बनी हुई है। व्यापारी और खरीददार नमी का हवाला देकर मक्का को औने-पौने भाव में खरीद रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मक्का की गुणवत्ता और बाजार मूल्य काफी हद तक उसकी नमी पर निर्भर करता है। अधिक नमी होने पर भंडारण में भी परेशानी आती है, इसलिए खरीददार कम कीमत लगाने लगते हैं। विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि बिक्री से पहले मक्का को अच्छी तरह सुखाकर ही बाजार में लाएं, जिससे बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। वहीं किसानों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त भंडारण और सुखाने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मजबूरी में उन्हें कम दामों पर उपज बेचनी पड़ रही है। इससे उत्पादन लागत निकालना भी कठिन हो रहा है। किसानों ने प्रशासन एवं कृषि विभाग से मांग की है कि मक्का सुखाने की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तथा उचित समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

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