
हाथरस 31 मई । साइबर क्राइम थाना पुलिस ने म्यूल खातों की जांच के दौरान एक ऐसे बैंक खाते का खुलासा किया है, जिसका संबंध देश के 18 राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से पाया गया है। जांच में सामने आया कि थाना मुरसान क्षेत्र के पटाखास कोरना निवासी रामगोपाल द्वारा संचालित चौधरी ट्रेडिंग कंपनी के खाते में साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। पुलिस ने खाता धारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। साइबर थाना में तैनात उपनिरीक्षक नीलेश यादव ने बताया कि पुलिस उपमहानिरीक्षक अलीगढ़ परिक्षेत्र एवं पुलिस अधीक्षक अपराध अलीगढ़ के निर्देशन में म्यूल खातों की जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 30 मई 2026 को संदिग्ध बैंक खातों की जांच के दौरान चौधरी ट्रेडिंग कंपनी का खाता संदिग्ध पाया गया। पोर्टल पर जांच करने पर पता चला कि यह खाता देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 18 साइबर फ्रॉड शिकायतों से जुड़ा हुआ है। इन शिकायतों में कुल 1 करोड़ 34 लाख 2 हजार 377 रुपये की साइबर ठगी दर्ज की गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी गई रकम में से 1 लाख 82 हजार 210 रुपये सीधे चौधरी ट्रेडिंग कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए गए थे।
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधियों ने संदेह से बचने के लिए ठगी की राशि को छोटे-छोटे हिस्सों में खाते में भेजा। यही कारण है कि खाते को म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका मजबूत हुई। साइबर अपराधी आमतौर पर ठगी की रकम सीधे अपने खातों में न लेकर ऐसे खातों में ट्रांसफर करते हैं और बाद में उसे निकाल लेते हैं। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस का मानना है कि खाता धारक रामगोपाल ने साइबर अपराधियों के साथ मिलकर ठगी की रकम को अवैध रूप से प्राप्त किया। इसी आधार पर उनके खिलाफ साइबर अपराध, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने संबंधित बैंक को पत्र भेजकर खाते को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही खाते से जुड़े अन्य लेन-देन और संभावित सहयोगियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी भी साइबर ठगी की घटना की तत्काल शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज कराएं। उन्होंने बताया कि 24 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज होने पर ठगी गई रकम वापस मिलने की संभावना अधिक रहती है।


























