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आगरा 12 मई । शारदा यूनिवर्सिटी आगरा में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) परमानंद ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं एवं शिक्षा के नवीन आयामों पर विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की। कुलपति ने कहा कि उनके पास इंडस्ट्री, टीचिंग एवं रिसर्च के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का समृद्ध एवं विविध अनुभव है। उन्होंने बताया कि वे एनएएसी के असेसर, एनबीए के इवैल्यूएटर तथा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के अंतर्गत नैबेट के असेसर के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं, जिससे हायर एजुकेशन में क्वालिटी एश्योरेंस को मजबूत किया जा रहा है। कुलपति ने बताया कि उनके द्वारा 155 से अधिक रिसर्च पेपर्स एवं 6 पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 125 से अधिक पेटेंट्स प्रकाशित हुए हैं, जिनमें से 48 पेटेंट्स ग्रांटेड हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री रेडी, स्किलफुल एवं रिसर्च ओरिएंटेड बनाना है। विश्वविद्यालय में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, स्किल डेवलपमेंट, इंडस्ट्री कोलैबोरेशन तथा रिसर्च बेस्ड एजुकेशन को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की क्षमता एवं रुचि के अनुरूप आधुनिक ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जा रही है। कुलपति महोदय ने कहा कि शारदा विश्वविद्यालय आगरा में शिक्षा को भारतीय संस्कारों एवं नैतिक मूल्यों के साथ जोड़ा गया है। फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों को इंडियन नॉलेज सिस्टम से परिचित कराया जाता है, जिससे वे भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों को आत्मसात कर सकें। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में विश्वविद्यालय में लगभग 15 प्रतिशत विद्यार्थी विदेशों से शिक्षा प्राप्त करने हेतु आए हैं। विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एजुकेशनल मॉडल्स विकसित किए जा रहे हैं तथा स्टार्टअप एवं प्लेसमेंट को और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है।

कुलपति ने युवा पीढ़ी में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गलत संगति एवं नशे के कारण अनेक विद्यार्थी अपनी शिक्षा को सही दिशा में विकसित नहीं कर पाते। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय द्वारा कम्युनिटी कनेक्ट प्रोग्राम संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से परिवार एवं समाज के सहयोग से विद्यार्थियों की समस्याओं को समझकर उनका समाधान किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कंपनियां केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि ट्रेंड एवं स्किलफुल युवाओं को प्राथमिकता देती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को इनोवेशन एवं स्टार्टअप के माध्यम से समाज की समस्याओं के समाधान हेतु प्रेरित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहा है, जो केवल जॉब प्राप्त करने वाले नहीं, बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने वाले बनें। कुलपति ने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी बड़े स्तर पर इनोवेशन या स्टार्टअप पर कार्य करना चाहता है, तो विश्वविद्यालय द्वारा एमएसएमई के माध्यम से लगभग 15 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कोविड काल के दौरान विश्वविद्यालय में वायरस डिटेक्शन लैब स्थापित की गई थी, जो उत्तर प्रदेश की अग्रणी लैब्स में शामिल रही। साथ ही सुपर कंप्यूटर लैब, रोबोटिक्स एवं ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित आधुनिक लैब्स भी विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत को पुनः “विश्व गुरु” बनाना है तो “मेक इन इंडिया” को आत्मसात करते हुए मैन्युफैक्चरिंग एवं इनोवेशन पर विशेष ध्यान देना होगा। इंपोर्ट की तुलना में एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, जिससे भारत आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सके। अंत में कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा क्वालिटी एजुकेशन, रिसर्च, इनोवेशन एवं संस्कार आधारित टीचिंग के माध्यम से शारदा विश्वविद्यालय आगरा को देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में स्थापित करने हेतु निरंतर कार्य कर रहा है।

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