
हाथरस 23 अप्रैल । जनपद के किसानों को उन्नत खेती और कीट-रोग प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए जिला कृषि रक्षा अधिकारी निखिल देव तिवारी ने विशेष परामर्श जारी किया है। उन्होंने बताया कि रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए मई-जून के महीने में परंपरागत कृषि विधियों को अपनाना नितांत आवश्यक है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करने से मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और कठोर परत टूटने से जड़ों का विकास बेहतर होता है। सूर्य की तेज किरणों के संपर्क में आने से जमीन के भीतर छिपे हानिकारक कीट जैसे दीमक, सफेद गिडार और कटुआ कीट के अंडे व लार्वा नष्ट हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त पथर चट्टा, जंगली चौलाई और दूब जैसे खरपतवारों के बीज भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे अगली फसल में इनका प्रकोप कम रहता है।
परामर्श में कहा गया है कि खेतों की मेंडों पर उगे खरपतवारों को नष्ट करने से हानिकारक सूक्ष्म जीवों के आश्रय स्थल खत्म हो जाते हैं। इससे फसलों को पोषक तत्वों के लिए खरपतवारों से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ती। गहरी जुताई से मृदा में वायु संचार बढ़ता है, जो लाभकारी सूक्ष्म जीवों की वृद्धि में सहायक होता है और पूर्व में उपयोग किए गए रसायनों के विषाक्त अवशेषों को खत्म करने में मदद करता है। किसानों की सुविधा के लिए विभाग ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। किसान भाई किसी भी कीट, रोग या खरपतवार की समस्या के निवारण के लिए प्रभावित पौधे की फोटो के साथ अपना विवरण व्हाट्सएप नंबर 9452247111 अथवा 9452257111 पर भेज सकते हैं। विभाग द्वारा 48 घंटे के भीतर समस्या का समाधान किसान के मोबाइल पर भेज दिया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए किसान राजकीय कृषि रक्षा इकाई या जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं।





















