हाथरस 12 दिसंबर । सावन कृपाल रूहानी मिशन के तत्वावधान में रविवार को जनपद की तीनों शाखाओं—कृपाल आश्रम (गौशाला मार्ग), कृपाल आश्रम (पिछोंती हसायन) एवं राजिंदर आश्रम (वीर नगर) पर भव्य आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान मिशन के प्रमुख व विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक सतगुरू संत राजिंदर सिंह जी महाराज एवं दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज के अनमोल वचनों को ऑडियो-वीडियो के माध्यम से संगत को श्रवण कराया गया।
आत्मिक पहचान ही वास्तविक सत्य
सत्संग में संत दर्शन सिंह जी महाराज ने संत तुलसी साहेब की वाणी का उदाहरण देते हुए समझाया कि संसार में ‘साधु संग, सतगुरु शरण, दया, दीन और उपकार’ ही पांच सार तत्व हैं। उन्होंने कहा कि हमारी वास्तविक पहचान शरीर या मन नहीं, बल्कि आत्मा है, जो परमात्मा का ही अंश है। मन और माया के पर्दों के कारण हम अपनी पहचान भूल चुके हैं, जिसे केवल पूर्ण सतगुरु की शरण और परोपकारी जीवन के माध्यम से ही पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
तिरंगे के रंगों से दी जीवन जीने की सीख
आध्यात्मिक सतगुरु संत राजिंदर सिंह जी महाराज ने मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह शरीर चौरासी लाख योनियों से छुटकारा पाने के लिए मिला है। उन्होंने भारत के तिरंगे झंडे के रंगों का अद्भुत उदाहरण देते हुए समझाया कि केसरिया रंग त्याग और सद्गुणों का, सफेद रंग पवित्रता का और हरा रंग शांति का प्रतीक है। हमें अपना जीवन इन्हीं गुणों से भरपूर बनाना चाहिए ताकि हम आत्मिक लक्ष्य को प्राप्त कर सकें। उन्होंने आगाह किया कि यह इंसानी चोला चंद लम्हों के लिए है, इसलिए समय रहते प्रभु प्राप्ति के मार्ग पर बढ़ना चाहिए।
विभिन्न सेवा प्रकल्पों का संचालन
सत्संग के उपरांत महाराज जी ने संगत को भजन-अभ्यास (ध्यान) कराया। इस अवसर पर मिशन की तीनों शाखाओं में विभिन्न गतिविधियां संचालित की गईं, जिनमें बाल सत्संग, निःशुल्क राजिंदर सिलाई सेंटर, दर्शन लाइब्रेरी, आध्यात्मिक बुक स्टाल और निःशुल्क आयुर्वेदिक व एलोपैथिक डिस्पेंसरी शामिल रहीं। प्याऊ के माध्यम से जल सेवा और सत्संग के अंत में लंगर प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी शाखाओं की प्रबंध समितियों के पदाधिकारियों एवं कर्मठ सेवादारों का विशेष सहयोग रहा।

























