
हाथरस 23 मार्च । क्षेत्र के ग्राम नगला मया (महौ) में एक पीड़ित किसान की व्यथा शासन और प्रशासन के ‘त्वरित निस्तारण’ के दावों पर सवालिया निशान लगा रही है। पीड़ित किसान चन्द्रपाल सिंह का आरोप है कि अपनी समस्या के समाधान के लिए वह पिछले लंबे समय से दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन न्याय मिलना तो दूर, उल्टा उसे आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
25 शिकायतों के बाद भी ढाक के वही तीन पात
किसान चन्द्रपाल सिंह के अनुसार, उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए अब तक लगभग 25 बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। हर बार अधिकारियों की ओर से केवल आश्वासन का झुनझुना थमा दिया गया। थक-हारकर किसान ने बीते 17 मार्च को जिलाधिकारी कार्यालय हाथरस पर शांतिपूर्ण धरना भी दिया, जहाँ उनकी बात सुनी तो गई लेकिन मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बिना पैमाइश के फलदार पेड़ उखाड़ने का आरोप
किसान का गंभीर आरोप है कि धरने के बाद जब प्रशासनिक अमला गाँव पहुँचा, तो उन्होंने अधिकारियों से निवेदन किया कि पहले उनकी बात सुनकर मौके की सही तरीके से नाप-तौल (पैमाइश) कराई जाए। आरोप है कि अधिकारियों ने किसान की बात को अनसुना कर दिया और बिना पूरी जानकारी लिए ही कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान खेत में खड़े दो नीम के पेड़ों को उखाड़कर गिरा दिया गया, जिससे किसान को आर्थिक क्षति पहुँची है।
प्रशासनिक कार्यशैली पर उठे सवाल
पीड़ित किसान चन्द्रपाल का कहना है कि लगातार गुहार लगाने के बाद भी समाधान नहीं हुआ, बल्कि मुझे ही नुकसान उठाना पड़ा। अब समझ में नहीं आता कि अपनी फरियाद लेकर कहाँ जाऊं।” इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि यदि एक किसान की 25 शिकायतों और धरने के बाद भी सुनवाई नहीं होती, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे संभव है।


























