
लखनऊ 10 मार्च । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। योगी सरकार ने अब उन्हें कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत राज्य के लगभग 2 लाख से अधिक शिक्षक एवं कर्मचारी लाभान्वित होंगे। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस (5 सितंबर 2025) पर की गई घोषणा को पूरा करते हुए यह निर्णय लिया है। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों और उनके आश्रितों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। इन अस्पतालों में चिकित्सा दरें आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मानकों के अनुरूप होंगी।
कौन होगा लाभान्वित?
यह सुविधा राज्य विश्वविद्यालयों के नियमित एवं स्ववित्तपोषित शिक्षकों के अलावा अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी मिलेगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी पहले से केंद्र या राज्य सरकार की अन्य स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आरोग्य योजना) का लाभ ले रहे हैं, उन्हें इस योजना में शामिल नहीं किया जाएगा।
सालाना 50 करोड़ का व्यय वहन करेगी सरकार
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, प्रति शिक्षक एवं कर्मचारी पर 2479.70 रुपये का वार्षिक प्रीमियम व्यय निर्धारित किया गया है। इस योजना पर सरकार प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये का भार वहन करेगी, जिसका बजट उच्च शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। पूरी योजना का संचालन ‘राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी’ (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा।
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
उच्च शिक्षा विभाग हर साल 30 जून तक लाभार्थियों का डेटा साचीज को उपलब्ध कराएगा। सरकार का मानना है कि यह निर्णय न केवल शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देगा, बल्कि उनके सामाजिक सम्मान और सुरक्षा के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।
























