
नई दिल्ली 26 फरवरी । विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने हवाई यात्रियों के लिए रिफंड और टिकट संशोधन की प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाते हुए नियमों में बड़ा संशोधन किया है। नए नियमों के तहत अब यात्रियों को टिकट बुकिंग के बाद 48 घंटे का ‘लुक-इन’ विकल्प मिलेगा, जिसके भीतर वे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपना टिकट रद्द या संशोधित कर सकेंगे। यह सुविधा उन घरेलू उड़ानों पर लागू होगी जिनकी प्रस्थान तिथि बुकिंग से कम से कम 7 दिन और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 15 दिन दूर है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि 48 घंटे की यह अवधि समाप्त होने के बाद ही कैंसलेशन या संशोधन शुल्क देय होगा।
नाम सुधारना हुआ मुफ्त, रिफंड की समयसीमा तय
डीजीसीए ने एयरलाइंस को सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि कोई यात्री टिकट बुकिंग के 24 घंटे के भीतर अपने नाम में सुधार करवाता है, तो एयरलाइन इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकती, बशर्ते टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से बुक किया गया हो। साथ ही, अब रिफंड की प्रक्रिया को 14 कार्यदिवसों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। यदि टिकट किसी ट्रैवल एजेंट या पोर्टल के माध्यम से लिया गया है, तब भी रिफंड सुनिश्चित करने की मुख्य जिम्मेदारी एयरलाइन की ही होगी क्योंकि एजेंट उनके नियुक्त प्रतिनिधि माने जाएंगे।
मेडिकल इमरजेंसी में भी मिलेगी राहत
संशोधित नियमों में चिकित्सा आपात स्थिति (Medical Emergency) का भी ध्यान रखा गया है। यदि यात्री या उसके परिवार का कोई सदस्य अस्पताल में भर्ती होता है, तो एयरलाइन रिफंड या क्रेडिट शेल प्रदान कर सकती है। अन्य चिकित्सा मामलों में, एयरोस्पेस मेडिसिन विशेषज्ञ या डीजीसीए पैनल के विशेषज्ञ से ‘यात्रा योग्यता प्रमाण पत्र’ प्राप्त होने पर ही रिफंड का लाभ मिलेगा। यह कदम पिछले समय में रिफंड को लेकर यात्रियों की बढ़ती शिकायतों और दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानों में आई बाधाओं के बाद उठाया गया है।
डीजीसीए में 38 विशेषज्ञों की होगी भर्ती
एक तरफ नियमों को सख्त किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर डीजीसीए स्वयं कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। नियामक में वर्तमान में लगभग 48% पद खाली हैं, जिन्हें भरने के लिए एयर सेफ्टी, एयरवर्थिनेस और कानूनी मामलों के लिए 38 कंसल्टेंट्स की अनुबंध आधारित भर्ती का निर्णय लिया गया है। विमानन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 1,630 स्वीकृत पदों में से 787 पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने के लिए समय-समय पर कदम उठाए जा रहे हैं ताकि विमानन सुरक्षा और सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे।















