
लखनऊ 18 जनवरी । यूपी के उन जिलों में जहां औसत से काफी कम नाम मतदाता सूची से कटे हैं, वहां बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव आयोग की गोपनीय समीक्षा में सामने आया है कि इन जिलों में कई गणना फॉर्मों को मतदाताओं के बिना फोटो और मोबाइल नंबर के जमा किया गया है। माना जा रहा है कि फोटो और मोबाइल नंबर मांगे जाने पर मृतक, स्थानांतरित या अनुपस्थित श्रेणी के और नाम मतदाता सूची से बाहर हो सकते थे। इसी संदर्भ में आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे दिए हैं। इन जिलों में बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना फॉर्म भरने के बजाय खुद ही फॉर्म जमा करने की आशंका भी जताई जा रही है। यूपी में 6 जनवरी को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी, जिसमें 27 अक्टूबर को फ्रीज की गई सूची की तुलना में 18.70 प्रतिशत नाम हटाए गए थे। हालांकि कई जिलों में यह प्रतिशत औसत से काफी कम रहा। उदाहरण के तौर पर ललितपुर में केवल 9.95 प्रतिशत नाम डिलीट किए गए, जहां समीक्षा में पाया गया कि बीएलओ ने बड़ी संख्या में फॉर्मों के साथ फोटो और मोबाइल नंबर अपलोड नहीं किए। इसी तरह पीलीभीत, अमरोहा, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, गाजीपुर और अम्बेडकरनगर में केवल 10.78 से 13.85 प्रतिशत नाम ही कटे। आयोग ने इन जिलों के गणना प्रपत्रों का भी विश्लेषण किया है। अब मसौदा सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरकर प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जबकि गणना चरण में जिन फॉर्मों की वापसी नहीं हुई थी, उन्हें हटा दिया गया था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों की ऑनलाइन बैठक में कहा कि आयोग SIR डेटा का विश्लेषण कर हर खामी को पकड़ लेगा। इसलिए किसी भी स्तर पर गलत काम न किया जाए। जिन जिलों में खामियां समय पर दुरुस्त नहीं की गईं, वहां जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

















