
सासनी 30 जून । प्रदेश भाजपा के प्रदेश मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने पैतृक आवास सासनी पहुंचे यतेन्द्र शर्मा का भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और स्थानीय नागरिकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। हालांकि उनके इस दौरे की सबसे अधिक चर्चा स्वागत समारोह से अधिक उस तरीके की रही, जिससे उन्होंने अपने गृह जनपद तक की यात्रा की।
आमतौर पर किसी बड़े राजनीतिक पद पर नियुक्ति के बाद नेताओं के गृह आगमन पर लंबा-चौड़ा काफिला, लग्जरी वाहनों की कतार और शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलता है। लेकिन यतेन्द्र शर्मा ने इस परंपरा से अलग राह चुनते हुए गाजियाबाद से सासनी तक का सफर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) की सरकारी बस से किया। जैसे ही उनके रोडवेज बस से सासनी पहुंचने की जानकारी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को मिली, सभी हैरान रह गए। परंपरा के अनुसार उन्हें रिसीव करने के लिए वाहनों के बड़े काफिले की व्यवस्था की गई थी और विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत की तैयारियां भी की गई थीं। लेकिन उनके सरकारी बस से पहुंचने के कारण लोगों में उत्सुकता का माहौल बन गया। कई लोगों ने इसे उनकी सादगी और आमजन से जुड़े रहने की सोच का प्रतीक बताया। सोशल मीडिया पर भी उनके इस कदम की व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे समय में जब सार्वजनिक जीवन में सादगी, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और अनावश्यक खर्चों को कम करने पर जोर दिया जा रहा है, किसी वरिष्ठ राजनीतिक पदाधिकारी का सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करना एक सकारात्मक संदेश देता है। इससे अनावश्यक वाहनों के काफिले, ईंधन की खपत और यातायात के दबाव में भी कमी आती है। यतेन्द्र शर्मा के बचपन के मित्र अरविंद तोमर बताते हैं कि उन्हें जानने वाले लोग इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि बड़े पदों पर रहने के बावजूद वह पहले भी अक्सर ट्रेन और सरकारी बस से ही गाजियाबाद से सासनी और हाथरस आया-जाया करते थे। उनके लिए यह कोई नई बात नहीं, बल्कि लंबे समय से उनकी जीवनशैली का हिस्सा रही है।
सासनी पहुंचने पर यतेन्द्र शर्मा का भाजपा कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उसका निर्वहन वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण संगठन, कार्यकर्ता और जनता का विश्वास है। यतेन्द्र शर्मा का यह सादा अंदाज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। समर्थकों का कहना है कि राजनीति में सादगी, जवाबदेही और जनता से सीधा जुड़ाव ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उनके अनुसार यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली और सार्वजनिक जीवन में सादगी का एक सकारात्मक संदेश भी है।






















