
हाथरस 14 अक्टूबर। आठ साल पुराने मारपीट और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग के मामले में विशेष न्यायालय ने फैसला सुनाया है। एडीजे विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट हर्ष अग्रवाल की अदालत ने सातों अभियुक्तों को एससी/एसटी एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया, जबकि मारपीट और अन्य धाराओं में दोषी करार देते हुए छह माह की सदाचरण परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया है।
मामला सिकंदराराऊ कोतवाली क्षेत्र का है। नगला भागे निवासी महीपाल ने पांच जुलाई 2016 को पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महीपाल सिकंदराराऊ के मोहल्ला ब्राह्मणपुरी में कपड़े धोने और प्रेस करने की दुकान चलाते थे। आरोप था कि घटना वाले दिन अमन, नीटू, परवेज, समीर सहित सात लोग दुकान पर पहुंचे और कपड़े समय से तैयार न होने को लेकर विवाद करने लगे। शिकायत के अनुसार, विवाद के दौरान मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। बीच-बचाव करने पहुंचे लोगों के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट सहित उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने अमन, नीटू, परवेज, समीर, नदीम, मुसाहिद और सनील को बलवा, मारपीट, धमकी देने तथा खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाने से संबंधित आरोपों में दोषी पाया। इसके बाद सभी को छह माह की सदाचरण परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया गया। इस अवधि में उन्हें शांति बनाए रखने और किसी भी अवैधानिक गतिविधि में शामिल नहीं होने की शर्त का पालन करना होगा। वहीं, एससी/एसटी एक्ट के आरोपों पर न्यायालय ने माना कि घटना दुकान के अंदर निजी दायरे में हुई थी और वहां कोई स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह मौजूद नहीं था। अदालत के अनुसार, मामले में अधिनियम के तहत सार्वजनिक दृष्टि से संबंधित आवश्यक तत्व साबित नहीं हो सका। इसी आधार पर सभी सातों अभियुक्तों को एससी/एसटी एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।









