हाथरस 12 सितम्बर। आज दून पब्लिक स्कूल में विद्यालय के प्रधानाचार्य जे०के० अग्रवाल के कुशल एवं ऊर्जावान दिशा-निर्देशन में सीबीएसई की सीबीपी (Capacity Building Programme) पर आधारित ‘एक्टिव लर्निंग’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन विद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक, प्रभावी एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराते हुए कक्षा-कक्ष में सक्रिय सहभागिता एवं सार्थक अधिगम को बढ़ावा देना रहा। कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन अरुण पांडेय,एच०ओ०डी० विज्ञान विभाग, आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल, मथुरा एवं विपिन कुमार शर्मा, टीजीटी फिजिक्स, ज्ञानदीप शिक्षा भारती सीनियर सेकेंड्री स्कूल, मथुरा ने अपने विशेष अनुभव एवं ज्ञान के माध्यम से शिक्षकों को सक्रिय अधिगम की विभिन्न प्रभावी रणनीतियों से परिचित कराया। कार्यशाला का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष विद्यालय प्रधानाचार्य एवं रिसोर्स पर्सनों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर किया गया।
तत्पश्चात स्वागत-गीत की मनमोहक प्रस्तुति द्वारा अतिथियों का अभिनंदन किया गया। प्रधानाचार्य जे०के० अग्रवाल ने कार्यशाला की विषय-वस्तु एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए दोनों रिसोर्स पर्सनों को पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य जे०के० अग्रवाल ने कहा कि “आज के शिक्षण परिवेश में केवल जानकारी प्रदान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को सीखने की प्रक्रिया का सक्रिय सहभागी बनाना आवश्यक है। सक्रिय अधिगम ऐसी शिक्षण-पद्धति है, जो विद्यार्थियों में जिज्ञासा, चिंतन, रचनात्मकता, समस्या-समाधान एवं आत्मविश्वास को विकसित करती है। एक शिक्षक तभी प्रभावी शिक्षण कर सकता है, जब वह स्वयं भी निरंतर सीखने और नवीन शिक्षण रणनीतियों को अपनाने के लिए तत्पर रहे। ऐसी कार्यशालाएँ शिक्षकों को अपने शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए प्रेरित करती हैं।”उन्होंने सभी प्रतिभागी शिक्षकों से कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान एवं रणनीतियों को कक्षा-कक्ष में व्यवहारिक रूप से लागू करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में दून पब्लिक स्कूल, हाथरस एवं सीमेक्स इंटरनेशनल स्कूल, सासनी से लगभग 60 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
कार्यशाला में पीपीटी एवं प्रोजेक्टर आधारित प्रस्तुतियों के साथ-साथ विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को सक्रिय अधिगम की अवधारणा, सार्थक सहभागिता, सक्रिय अधिगम के लिए आकर्षक रणनीतियाँ, प्रभावी सक्रिय अधिगम के मार्ग का निर्माण तथा गतिविधि-योजना की रूपरेखा तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों से अवगत कराया गया। रिसोर्स पर्सनों ने गतिविधि-आधारित एवं सहभागी शिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को यह अनुभव कराया कि किस प्रकार कक्षा-कक्ष को अधिक संवादात्मक, रोचक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जा सकता है। शिक्षकों ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करते हुए नवीन शिक्षण तकनीकों को आत्मसात किया कार्यशाला के सफल आयोजन ने शिक्षकों में नवाचार, सक्रिय सहभागिता एवं प्रभावी शिक्षण के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया। इस अवसर पर विद्यालय प्रधानाचार्य ने दून पब्लिक स्कूल, हाथरस के प्रतिष्ठित रिसोर्स पर्सनों एवं भावी (आने वाले समय के) रिसोर्स पर्सनों को राधे पट्टिका एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया, जिसमें फाउंडेशन कोऑर्डिनेटर नम्रता अग्रवाल, शिक्षिका मेदनी कौशिक, शिवानी कुशवाहा, अनुपमा राघव,शिक्षक अमित चौहान, शुभम गर्ग, समीर खान, सागर जोशी, नैतिक राठौर रहे। सीबीएसई के अंतर्गत निर्धारित 50 घंटे की वार्षिक प्रशिक्षण व्यवस्था में से 25 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य है। इसी क्रम में आज आयोजित ‘एक्टिव लर्निंग’ विषय की कार्यशाला 6 घंटे के अनिवार्य प्रशिक्षण के रूप में मान्य होगी। कार्यशाला का समापन शिक्षक नैतिक राठौर ने विद्यालय प्रधानाचार्य, अतिथि रिसोर्स पर्सनों एवं समस्त शिक्षक/ शिक्षिकाओं का आभार व्यक्त कर किया। इस कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूर्ण करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सीखने की प्रक्रिया से जोड़कर उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करना है।







