
हाथरस। श्री दाऊजी महाराज मंदिर किला स्थित श्री वेद भगवान शिविर में धार्मिक कवि सम्मेलन का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ श्री वेद भगवान तथा मां शारदा के समक्ष अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ‘फौजी’, आशु कवि अनिल बौहरे, संयोजक श्यामबाबू चिंतन और वासुदेव उपाध्याय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। धार्मिक कवि सम्मेलन में उभरती कवयित्री चाहत शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करते हुए ‘मां शारदे वरदान दो, मुझको नवल उत्थान दो’ की प्रस्तुति दी। उन्होंने दाऊ बाबा की महिमा का वर्णन करते हुए अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। प्रभु दयाल प्रभु दीक्षित ने दाऊजी महाराज को शेषनाग का अवतार बताते हुए त्रेता में लक्ष्मण और द्वापर में बलराम के रूप में उनके स्वरूप का वर्णन किया। कवि जीवन लाल शर्मा ने कबीर के दोहे के माध्यम से जीवन की सार्थकता का संदेश दिया। वहीं श्यामबाबू चिंतन ने ‘मर्यादा फिर से बंधे, राम राज्य की आस, हर घर सीताराम हो, कवि हौ तुलसीदास’ जैसी रचना प्रस्तुत कर रामराज्य और धार्मिक मूल्यों का संदेश दिया। डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ‘फौजी’ ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की, जबकि दीपक रफी ने ‘भूला हूं ना भूलूंगा मैं राम का नाम’ के माध्यम से प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था व्यक्त की।
प्रदीप पंडित ने ‘राधे-राधे कहने से श्याम मिल जाएंगे’ जैसी भक्ति रचना सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सम्मेलन में वासुदेव उपाध्याय, कृष्णा दीक्षित, देवी सिंह ‘निडर’, मास्टर जी, रिंकू कौशिक, कृष्ण वर्मा सहित अन्य कवियों ने भी धार्मिक रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा और सम्मेलन भक्ति एवं धर्ममय वातावरण में आगे बढ़ता रहा। सम्मेलन की व्यवस्थाएं इंजीनियर देव स्वरूप शर्मा और दीपक रफी द्वारा सुचारू रूप से संभाली गईं। इंजीनियर देव स्वरूप शर्मा ने सभी कवियों और श्रोताओं का पीत पट्टिका पहनाकर स्वागत किया। इसके बाद श्री वेद भगवान के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ‘फौजी’, सत्येंद्र स्वरूप शर्मा और इंजीनियर देव स्वरूप शर्मा ने सभी कवियों को वेद भगवान की प्रसादी के स्वरूप में लिफाफा एवं छवि चित्र भेंट कर सम्मानित किया। अंत में श्री वेद भगवान, दाऊजी महाराज और रेवती मैया के जयकारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दौरान ‘धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो’, ‘सनातन धर्म की जय हो’ तथा ‘पार्वती पतये हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।






