
हाथरस 02 नवंबर। दीपावली के उल्लास, भारतीय संस्कृति की मनमोहक छटा और सामाजिक एकता के संदेश के साथ सेठ मलूक चंद इंटरनेशनल स्कूल, आगरा रोड, हाथरस में 31 अक्टूबर को ‘आगाज़ – A Celebration of Togetherness’ का भव्य आयोजन किया गया। उत्सव, रचनात्मकता, कला और आपसी सौहार्द से सजे इस आयोजन ने शहरवासियों को एक यादगार अनुभव प्रदान किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दीपावली के पर्व को केवल रोशनी और खुशियों तक सीमित न रखते हुए स्थानीय प्रतिभाओं, हस्तशिल्प कलाकारों, उद्यमियों, सामाजिक संस्थाओं और आमजन को एक साझा मंच उपलब्ध कराना रहा। इसके माध्यम से भारतीय परंपराओं, स्वदेशी उत्पादों और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। आयोजन में दीपावली की आकर्षक सजावट, हस्तनिर्मित कलात्मक वस्तुएं, खूबसूरत मोमबत्तियां एवं दीये, रेजिन आर्ट, आभूषण, एक्सेसरीज़, हैंडलूम उत्पादों और विभिन्न रचनात्मक वस्तुओं की प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। वहीं गेमिंग जोन और मनोरंजक गतिविधियों ने कार्यक्रम को पारिवारिक एवं उत्साहपूर्ण स्वरूप प्रदान किया। लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर स्थानीय कलाकारों और उद्यमियों की प्रतिभा की सराहना की।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, चिकित्सकों तथा शहर के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती श्वेता चौधरी, पूर्व सांसद श्री राजेश दिवाकर, सांसद श्री अनूप प्रधान वाल्मीकि, भाजपा उपाध्यक्ष श्री शरद माहेश्वरी तथा निस्वार्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष श्री सुनील अग्रवाल की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इसके अलावा सामाजिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र में सक्रिय श्री निमेष वार्ष्णेय और श्रीमती प्रज्ञा वार्ष्णेय ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। सासनी चेयरमैन की धर्मपत्नी एवं वार्ष्णेय समिति की अध्यक्षा श्रीमती प्रगति वार्ष्णेय की उपस्थिति ने भी आयोजन की गरिमा बढ़ाई। शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, चिकित्सकों और विभिन्न सामाजिक एवं व्यावसायिक वर्गों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आयोजन को व्यापक सामाजिक सहभागिता का स्वरूप प्रदान किया। ‘आगाज़ – A Celebration of Togetherness’ का मूल संदेश यही रहा कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एक मंच पर एकजुट होते हैं, तो त्योहार केवल उत्सव नहीं रह जाते, बल्कि आपसी प्रेम, सहयोग, सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का माध्यम बन जाते हैं।







