सासनी 11 अक्टूबर। कस्बे के श्रीरामलीला मैदान में मानस कला मंच के कलाकारों द्वारा आयोजित वार्षिक रामलीला में श्रवण कुमार और राजा दशरथ के मरण की मर्मस्पर्शी लीला का मंचन किया गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। लीला के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे नजर आए और पूरा वातावरण भगवान श्रीराम के जयकारों से भक्तिमय हो गया। रामलीला मंचन का शुभारंभ अतिथियों ने भगवान श्रीराम के स्वरूप की आरती उतारकर किया। इसके बाद मंच पर श्रवण कुमार की लीला का मंचन हुआ। कलाकारों ने दिखाया कि किस प्रकार श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर ले जाते हैं। यात्रा के दौरान प्यास लगने पर वह नदी से जल भरने पहुंचते हैं। इसी दौरान राजा दशरथ शिकार के लिए निकले होते हैं और पानी भरने की आवाज को किसी जानवर की आवाज समझकर शब्दभेदी बाण चला देते हैं, जो श्रवण कुमार को लग जाता है।
श्रवण कुमार के घायल होने और उनकी मृत्यु का समाचार सुनकर उनके माता-पिता शोक में डूब जाते हैं। पुत्र वियोग से व्यथित होकर वे राजा दशरथ को भी पुत्र के वियोग में प्राण त्यागने का श्राप देते हैं। कलाकारों ने इस प्रसंग को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे देखकर दर्शक भावुक हो उठे। लीला के अगले दृश्य में भगवान श्रीराम के वनवास जाने के बाद राजा दशरथ को श्रवण कुमार के माता-पिता द्वारा दिया गया श्राप याद आता है। श्रीराम से बिछड़ने की पीड़ा और पुत्र वियोग में व्याकुल राजा दशरथ बार-बार ‘हे राम, हे राम’ पुकारते हैं और अंततः अपने प्राण त्याग देते हैं। दशरथ मरण के इस दृश्य ने रामलीला मैदान में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के मंत्री डॉ. लोकेश शर्मा, अध्यक्ष लीलाधर शर्मा, संरक्षक प्रकाश चंद शर्मा, प्रदीप कुमार गुप्ता, जयप्रकाश माहेश्वरी, रामनिवास शर्मा, मदनगोपाल अग्रवाल, उपाध्यक्ष नागेंद्र शर्मा, कोषाध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल, आय-व्यय निरीक्षक धीरेंद्र कुमार गांधी, अनिल कुमार गुप्ता, अरविंद गुप्ता, सुनील वार्ष्णेय, ब्रजेश शर्मा ‘बब्बू’, महिपाल सिंह और विमल शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।










