
हाथरस 14 सितम्बर। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोग संदर्भों, विभिन्न स्तरों पर लंबित जांच आख्याओं तथा राजस्व विभाग के अंतर्गत राजस्व न्यायालयों एवं विभिन्न धाराओं में योजित और लंबित वादों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी अतुल वत्स ने संबंधित अधिकारियों को राजस्व एवं भूमि संबंधी प्रकरणों का समयबद्ध, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने आयोग संदर्भों एवं लंबित जांच प्रकरणों की विभागवार समीक्षा करते हुए कहा कि आयोग से संबंधित संदर्भ एवं जांच प्रकरण शासन एवं आयोग की प्राथमिकता से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। इनके निस्तारण में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने लंबित जांच आख्याओं का नियमानुसार परीक्षण करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में संबंधित अभिलेखों एवं तथ्यों का गहन परीक्षण कर स्पष्ट और तथ्यपरक जांच आख्या तैयार की जाए। जांच आख्या में प्रकरण के तथ्य, की गई कार्रवाई एवं निष्कर्ष का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। जिन मामलों में किसी अन्य विभाग अथवा अधिकारी से सूचना या आख्या अपेक्षित है, उनमें तत्काल समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पुराने एवं लंबे समय से लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश भी दिए गए।
डीएम ने विभिन्न तहसीलों में लंबित राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए निर्धारित अवधि से अधिक समय से लंबित मामलों को विशेष प्राथमिकता के साथ निस्तारित करने को कहा। उन्होंने प्रत्येक प्रकरण की नियमित समीक्षा कर प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि आमजन को समय से न्याय मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि निस्तारण में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में फार्मर रजिस्ट्री तैयार किए जाने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने तथा तैयार फार्मर रजिस्ट्री का खतौनी अभिलेखों से मिलान कर त्रुटियों को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों के भूमि अभिलेखों की शुद्धता एवं पारदर्शिता बनाए रखने की दृष्टि से फार्मर रजिस्ट्री का कार्य बेहद महत्वपूर्ण है। जिलाधिकारी ने नामांतरण, सीमांकन, वरासत, खसरा-खतौनी अभिलेखों के संधारण, भू-अभिलेख संशोधन, चकबंदी, भूमि आवंटन, अतिक्रमण संबंधी प्रकरणों तथा भू-राजस्व वसूली की प्रगति की भी समीक्षा की। भूमि विवादों से जुड़े मामलों में राजस्व एवं पुलिस विभाग को आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए, ताकि विवादों का त्वरित एवं न्यायसंगत समाधान हो सके।
उन्होंने कहा कि राजस्व अभिलेखों की शुद्धता एवं अद्यतन स्थिति बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए अभिलेखों के डिजिटलीकरण, नियमित सत्यापन एवं रिकॉर्ड के उचित संधारण पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण में तेजी लाकर न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाए। शासन द्वारा संचालित विशेष राजस्व अभियानों को पूरी गंभीरता से संचालित करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अपर जिलाधिकारी न्यायिक, मुख्य चिकित्साधिकारी, उप जिलाधिकारी, प्रभारी अधिकारी कलेक्ट्रेट, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने कहा कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं जनसंतुष्टि सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।










