
हाथरस 12 अक्टूबर। धान की बंपर आवक के चलते घोषित दो दिन की बंदी के बाद रविवार को मंडी समिति परिसर खाली हो गया, लेकिन किसानों को धान बेचने के लिए प्रवेश नहीं मिल सका। शुक्रवार रात से धान से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों के साथ मंडी गेट पर खड़े किसान तीन दिन से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ किसान वापस लौट गए, जबकि दूरदराज के गांवों से आए किसान अतिरिक्त खर्च के चलते गेट पर ही डेरा डाले हुए हैं। मंडी में धान की भारी आवक और व्यापारियों के माल की लोडिंग नहीं हो पाने के कारण मंडी प्रशासन ने शुक्रवार को शनिवार और रविवार को बंदी घोषित की थी। इस दौरान मंडी का गेट बंद रखकर व्यापारियों के माल की लोडिंग और निकासी कराई गई। शुक्रवार रात करीब 11 बजे से धान लेकर पहुंचे किसानों को प्रवेश नहीं दिया गया। रविवार को भी व्यापारियों के माल की निकासी और मंडी परिसर की सफाई पर जोर रहा। किसानों का कहना है कि जब रविवार को मंडी परिसर खाली हो गया था, तो उन्हें धान उतारने के लिए प्रवेश दिया जाना चाहिए था।
तीन दिन से गेट पर डेरा डाले किसान
गांव टुकसान निवासी किसान विजय सिंह ने बताया कि वह शुक्रवार रात करीब 11 बजे ट्रैक्टर से धान लेकर मंडी पहुंचे थे। यहां आने पर उन्हें दो दिन की बंदी की जानकारी मिली। तीन दिन बीतने के बाद भी वह मंडी के गेट पर ही खड़े हैं। उनका गांव करीब 25 किलोमीटर दूर है। वापस लौटने और फिर मंडी आने में डीजल का खर्च बढ़ जाएगा, इसलिए वह दिन-रात गेट पर इंतजार कर रहे हैं। खाने के लिए सुबह-शाम ढाबे पर जाना पड़ रहा है।
मैक्स का रोजाना एक हजार रुपये किराया
दरकौली निवासी किसान रामपाल ने बताया कि वह शुक्रवार रात करीब 12 बजे मैक्स गाड़ी में धान लेकर मंडी पहुंचे थे। गाड़ी एक हजार रुपये प्रतिदिन के किराये पर ली है। तीन दिन में तीन हजार रुपये किराया हो चुका है, जबकि खाने-पीने का खर्च अलग से बढ़ रहा है। किसान का कहना है कि रविवार को मंडी खाली होने के बाद प्रवेश मिल जाता तो वह आढ़ती के फड़ पर धान उतरवाकर गाड़ी खाली कर देते और आगे का किराया बच जाता। मंडी सचिव अनिल कुमार ने बताया कि रविवार को व्यापारियों के माल की निकासी पर जोर दिया गया। इसके साथ ही मंडी परिसर की सफाई भी कराई गई है। उन्होंने बताया कि सोमवार को मंडी निर्धारित समय पर खोली जाएगी।










