
हाथरस 07 अक्टूबर। अलीगढ़ रोड स्थित मंडी समिति में बुधवार को बंदी रहने के कारण धान लेकर पहुंचे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मंडी बंद रहने की जानकारी के बावजूद मंगलवार देर रात से ही बड़ी संख्या में किसान अपने धान से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मंडी पहुंचने लगे थे। रात बढ़ने के साथ मंडी के बाहर ट्रैक्टरों की लंबी कतार लग गई और देखते ही देखते अलीगढ़ रोड पर वाहनों की संख्या इतनी बढ़ गई कि यातायात व्यवस्था प्रभावित होने लगी। धान लेकर मंडी पहुंचे किसानों को मंडी परिसर में प्रवेश मिलने का इंतजार करना पड़ा, जिसके चलते देर रात तक मंडी के बाहर अफरा-तफरी और असमंजस की स्थिति बनी रही। कई किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ सड़क किनारे खड़े होकर मंडी का गेट खुलने का इंतजार करते नजर आए। मंडी में प्रवेश को लेकर किसानों की मंडी कर्मचारियों और मंडी गार्ड से तीखी नोकझोंक भी हो गई। किसानों का कहना था कि वे काफी दूर से धान लेकर मंडी पहुंचे हैं और लंबे समय तक बाहर खड़े रहने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है। जब काफी देर तक मंडी परिसर में प्रवेश नहीं मिला तो कुछ किसानों ने अपने ट्रैक्टर सड़क पर ही खड़े कर दिए। ट्रैक्टरों की संख्या बढ़ने के कारण अलीगढ़ रोड पर कुछ समय के लिए जाम जैसे हालात बन गए। सड़क पर धान से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी होने के कारण दूसरे वाहन चालकों को भी निकलने में परेशानी हुई और यातायात की रफ्तार धीमी हो गई। स्थिति बिगड़ती देख मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत कर उन्हें समझाया। पुलिस ने सड़क पर खड़े ट्रैक्टरों को किनारे लगवाया, जिसके बाद यातायात व्यवस्था को सामान्य कराया जा सका।
देर रात मंडी के बाहर बड़ी संख्या में किसान अपने वाहनों के साथ खड़े रहे। किसानों का कहना था कि धान की फसल लेकर वे मंडी में बिक्री के लिए पहुंचे थे, लेकिन मंडी बंद होने और प्रवेश नहीं मिलने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। रात के समय खुले में ट्रैक्टरों के साथ इंतजार करना किसानों के लिए परेशानी का कारण बना रहा। वहीं, मंडी के बाहर वाहनों की लंबी कतार के कारण आसपास के क्षेत्र में भी यातायात का दबाव बढ़ गया। किसानों को उम्मीद थी कि मंडी का गेट खुलने के बाद उन्हें जल्द ही अंदर प्रवेश मिल जाएगा, लेकिन काफी देर तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण किसान परेशान दिखाई दिए। बताया गया कि बुधवार सुबह करीब पांच बजे मंडी समिति का मुख्य गेट खोला गया। इसके बाद मंडी के बाहर कतार में खड़े धान से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को धीरे-धीरे मंडी परिसर के अंदर प्रवेश कराया गया। किसानों के वाहन अंदर पहुंचने के बाद मंडी का गेट दोबारा बंद कर दिया गया। बुधवार को मंडी में नियमित खरीद-बिक्री का काम बंद रहा, लेकिन इसके बावजूद मंडी परिसर में बड़ी मात्रा में धान पड़ा हुआ दिखाई दिया। मंडी में पहले से मौजूद धान और बाहर से पहुंचे वाहनों की संख्या को देखते हुए परिसर में काफी दबाव की स्थिति नजर आई। मंडी समिति के मुख्य गेट पर बुधवार को मंडी बंद रहने से संबंधित सूचना का प्रपत्र भी चस्पा किया गया था, जिससे मंडी प्रशासन की ओर से बंदी की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई।
मंडी प्रशासन के अनुसार, धान की भारी आवक के साथ-साथ मंडी परिसर में पहले से पड़े माल के उठान का दबाव लगातार बढ़ रहा था। इसी वजह से मंडी में बुधवार को बंदी रखने का निर्णय लिया गया, ताकि परिसर में मौजूद माल के निस्तारण और व्यवस्थाओं को व्यवस्थित किया जा सके। हालांकि, बंदी के दौरान भी बड़ी संख्या में किसान धान लेकर मंडी पहुंच गए, जिसके कारण मंडी के बाहर वाहनों की लंबी कतार लग गई और किसानों को इंतजार करना पड़ा। मंडी के बाहर मौजूद किसानों में इस बात को लेकर नाराजगी भी दिखाई दी कि उन्हें मंडी बंद होने और प्रवेश व्यवस्था के बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इस संबंध में मंडी समिति के सचिव अनिल कुमार ने बताया कि मंडी में माल का अत्यधिक दबाव होने के कारण बुधवार को मंडी बंद रखने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने बताया कि मंडी परिसर में पहले से काफी मात्रा में माल मौजूद था और धान की आवक भी अधिक थी, जिसके चलते व्यवस्था को देखते हुए एक दिन के लिए मंडी बंद की गई। मंडी सचिव ने कहा कि गुरुवार को मंडी सुचारू रूप से संचालित होगी और सामान्य रूप से कामकाज शुरू किया जाएगा। बहरहाल, धान की भारी आवक के बीच मंडी में एक दिन की बंदी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। मंगलवार देर रात से बुधवार सुबह तक मंडी के बाहर ट्रैक्टरों की लंबी कतार, किसानों की कर्मचारियों से नोकझोंक और अलीगढ़ रोड पर बने जाम जैसे हालात ने मंडी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति संभली और वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात सुचारू कराया गया। अब गुरुवार को मंडी खुलने के बाद यह देखना होगा कि धान की भारी आवक और मंडी में पहले से मौजूद माल के बीच खरीद-बिक्री की व्यवस्था किस तरह संचालित होती है और किसानों को अपनी फसल बेचने में कितनी आसानी होती है।







