
नई दिल्ली 21 फरवरी । केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी जनवरी माह की मासिक निगरानी रिपोर्ट में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। देशव्यापी जांच के दौरान कुल 240 दवाओं के नमूने ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) यानी मानकों से कम गुणवत्ता वाले पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 68 सैंपलों को केंद्रीय दवा प्रयोगशालाओं और 172 सैंपलों को राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं ने परीक्षण के बाद असुरक्षित या मानकों से कमतर घोषित किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट केवल जांचे गए विशेष ‘बैच’ तक सीमित है और कंपनी के अन्य उत्पादों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन संबंधित बैच के उपयोग से मरीजों की सेहत को खतरा हो सकता है।
निगरानी रिपोर्ट में गुणवत्ता की कमी के साथ-साथ नकली दवाओं के काले कारोबार का भी पर्दाफाश हुआ है। जांच के दौरान दिल्ली, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से तीन नकली दवाएं बरामद की गई हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इन दवाओं को अवैध निर्माताओं ने किसी प्रतिष्ठित ब्रांड के नाम का सहारा लेकर बाजार में उतारा था। CDSCO ने इन नकली दवाओं के नेटवर्क को तोड़ने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बाजार में मौजूद इन घटिया और नकली दवाओं को वापस मंगाने और इन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया राज्य औषधि नियामकों के साथ मिलकर तेज कर दी गई है।
दवाओं की शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए CDSCO हर महीने विभिन्न राज्यों से रैंडम नमूने लेकर उनका परीक्षण करता है। इस माह की रिपोर्ट में इतनी बड़ी संख्या में नमूनों के फेल होने से दवा उद्योग और आम उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ गई है। विभाग ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। विशेषज्ञों ने आम जनता को सलाह दी है कि वे दवा खरीदते समय बैच नंबर की जांच अवश्य करें और संदिग्ध लगने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े
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कुल फेल सैंपल: 240 (NSQ घोषित)
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केंद्रीय लैब से फेल: 68 सैंपल
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राज्य लैब से फेल: 172 सैंपल
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नकली दवाएं बरामद: 03 (दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल)















