
हाथरस 03 मई । विश्व हास्य दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य एवं सांस्कृतिक संस्था ब्रज कला केंद्र (हाथरस शाखा) द्वारा आगरा रोड स्थित श्री राधा कृष्ण कृपा भवन में एक भव्य काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवियों ने अपनी हास्य रचनाओं से श्रोताओं को हँसने पर मजबूर कर दिया और समाज में सकारात्मकता का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध आशु कवि अनिल बोहरे ने की। उन्होंने कार्यक्रम का आगाज़ करते हुए कहा कि हँसी के दो बोल जो दिल से निकल जाते हैं, सूने से माहौल में भी रंग भर जाते हैं। कार्यक्रम का कुशल संचालन चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा किया गया। उन्होंने हास्य की महत्ता बताते हुए कहा कि मुस्कान अगर हो साथ तो सफर आसान हो जाता है, हास्य का छोटा सा पल भी जीवन महान बना जाता है। समारोह के दौरान यह निर्णय लिया गया था कि सर्वाधिक हास्य उत्पन्न करने वाले कवि को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। वरिष्ठ साहित्यकार प्रभु दयाल दीक्षित ‘प्रभु’ ने अपनी हास्यपूर्ण और प्रभावशाली प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा पीत वस्त्र, माल्यार्पण एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। विशेष बात यह रही कि इसी दिन प्रभु जी का जन्मदिन भी था, जिस पर सभी उपस्थित साहित्यकारों ने उन्हें बधाई दी।
गोष्ठी में विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हास्य के रंग बिखेरे। रोशन लाल वर्मा ने सुनाया कि हँसी के बिना जीवन सूना लगता है, मुस्कुराता चेहरा ही सबसे अच्छा लगता है। गफिन स्वामी ने कहा कि जो हँसना जान गया, वो हर ग़म से जीत गया, जीवन की हर मुश्किल को हँसकर ही जीत गया। इस अवसर पर डॉ. सुनीता उपाध्याय (प्रधानाचार्य), पं. अविनाश चंद्र पचौरी, जीवन लाल शर्मा, हरी शंकर वर्मा, जय शंकर पाराशर, कपिल नरूला, पीयूष अग्निहोत्री, राजेंद्र ‘राजू’ सहित अनेक गणमान्य नागरिक और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि हँसी तनाव दूर करने और समाज में ऊर्जा भरने का सबसे सशक्त माध्यम है।


























