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हाथरस 01 जून । जनपद के किसान भाइयों के लिए एक बेहद जरूरी और सतर्क करने वाली खबर है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी निखिल देव तिवारी ने जानकारी दी है कि हाथरस में मक्का, बाजरा और कुछ अन्य फसलों में ‘फाल आर्मी वर्म’ नामक विनाशकारी कीट का प्रकोप देखा गया है। फसलों को इस नुकसान से समय रहते बचाने के लिए कृषि रक्षा विभाग द्वारा एक विशेष एडवायजरी जारी की गई है, जिसमें किसानों को इस कीट की सटीक पहचान और उससे निपटने के कारगर वैज्ञानिक तरीके बताए गए हैं। कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि इस कीट की पहचान करना बेहद आसान है। इसकी मादा ज्यादातर पत्तियों की निचली सतह पर, और कभी-कभी ऊपरी सतह या तनों पर एक बार में 50 से 200 तक अंडे देती है, जो सफेद झाग से ढके होते हैं। इसका लार्वा भूरे-धूसर रंग का होता है, जिसके सिर पर अंग्रेजी का उल्टा ‘Y’ अक्षर बना होता है। यह लार्वा मक्के के छोटे पौधों के गोभ (भीतरी हिस्से) में घुसकर उन्हें अंदर से खा जाता है। फसल की बढ़वार के समय यदि पत्तियों में बड़े छेद दिखें या गोभ के पास महीन भूसे के बुरादे जैसा उत्सर्जित पदार्थ नजर आए, तो समझ लें कि फसल पर फाल आर्मी वर्म का हमला हो चुका है। इस कीट से फसल के बचाव के लिए विभाग ने तीन स्तरों पर नियंत्रण के उपाय सुझाए हैं। शुरुआती अवस्था में (यदि 1 से 5 प्रतिशत पौधे प्रभावित हों) एन.पी.वी. 250 एल.ई., मेटाराइजियम एनिसोप्ली (5 ग्राम प्रति लीटर) या बी.टी. (2 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा नीम ऑयल (5 मिली प्रति लीटर) का घोल भी बेहद असरदार है। पारंपरिक तरीके के रूप में पौधों की गोभ में रेत और बुझा चूना 9:1 के अनुपात में मिलाकर डालने से भी लार्वा नष्ट हो जाता है। जैविक और यांत्रिक नियंत्रण के लिए खेतों में प्रति एकड़ 3 से 4 लाइट ट्रैप (शाम 7 से 9 बजे), 6 से 8 बर्ड पर्चर (पक्षियों के बैठने का स्थान) या प्रति हेक्टेयर 35 से 40 फेरोमोन ट्रैप लगाना बेहद प्रभावी साबित होता है। यदि फसल में नुकसान 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गया हो, तो किसानों को तुरंत रासायनिक कीटनाशकों का सहारा लेना चाहिए। इसके लिए क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5% SC (0.4 मिली प्रति लीटर) या इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (0.4 ग्राम प्रति लीटर) या स्पाइनोसैड (0.3 मिली प्रति लीटर) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, क्लोरोपायरीफास 50% + साइपरमेथ्रिन 5% EC (200 मिली प्रति एकड़) को लगभग 200 लीटर पानी में मिलाकर शाम के समय छिड़काव करने से इस खतरनाक कीट पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है।

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