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हाथरस 28 मई । श्री रामबाग इंटर कॉलेज में हैहयवंशीय क्षत्रिय काँस्यकार समाज द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास महंत श्री मदन मोहन दास जी महाराज ने ध्रुव चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उसकी महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। महंत श्री मदन मोहन दास जी महाराज ने कहा कि माता के वचनों से प्रेरित होकर बालक ध्रुव वन की ओर चल पड़े। मार्ग में उन्हें देवर्षि नारद मिले, जिन्होंने उन्हें वापस लौटने का आग्रह किया, लेकिन ध्रुव के अटूट संकल्प को देखकर नारद जी ने उन्हें “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की दीक्षा दी। इसके बाद ध्रुव ने मधुबन में जाकर कठोर तपस्या की। उन्होंने कई महीनों तक भूखे-प्यासे रहकर ऐसी तपस्या की जिससे तीनों लोक कांप उठे। उन्होंने बताया कि ध्रुव की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। कथा के दौरान महंत जी ने “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र जाप का महत्व भी बताया तथा भगवान नामदेव और सुखदेव जी के जीवन प्रसंगों का वर्णन किया। महंत जी ने कहा कि कलयुग में भवसागर से पार पाने का सबसे सरल मार्ग भगवान “हरि” के नाम का जाप है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के नाम स्मरण और भक्ति में जीवन समर्पित करने का आह्वान किया। कथा के दौरान अचानक वर्षा शुरू हो गई, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था जरा भी विचलित नहीं हुई। भक्तजन पूरे भाव-विभोर होकर कथा श्रवण करते रहे। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए मीठे शरबत एवं ठंडे जल की सेवा की व्यवस्था भी की गई।

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