
नई दिल्ली 22 जुलाई। दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य दृश्य सामग्री (वीडियो फुटेज) को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को इस मामले में चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई को चुनौती देती है। याचिका में छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 18 जुलाई को हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच, सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन, विकास सिंह और गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि छात्र NEET परीक्षा से संबंधित अपनी मांगों को लेकर करीब 20 दिनों से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और इस दौरान किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई थी।
पुलिस कार्रवाई पर लगाए गए गंभीर आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने बिना पूर्व चेतावनी के प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। अधिवक्ताओं ने अदालत में दावा किया कि कुछ लाठियों में कीलें लगी हुई थीं तथा पुलिस ने पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन और टेजर का भी इस्तेमाल किया। इसके अलावा, महिलाओं के साथ बदसलूकी और निजी अंगों पर हमला किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि कई पुलिसकर्मियों की वर्दी पर नाम-पट्टिका नहीं लगी थी, जिससे उनकी पहचान संभव नहीं हो सकी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से घटना के वीडियो फुटेज देखने और स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है। उनका दावा है कि इस घटना में 90 से अधिक छात्र घायल हुए हैं। फिलहाल, ये सभी आरोप याचिका में लगाए गए दावे हैं, जिन पर अदालत ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित दृश्य सामग्री सुरक्षित रखने के निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई जारी रखी है।






