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सिकन्दराराऊ 29 जून । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन विभाग में प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का संयुक्त आंदोलन सोमवार को 20वें दिन भी पूरे जोश और एकजुटता के साथ जारी रहा। उप-पंजीयन कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन करते हुए आंदोलनकारियों ने सरकार से निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल वापस लेने की मांग की और स्पष्ट किया कि जब तक निर्णय वापस नहीं लिया जाता, उनका लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। धरने की अध्यक्षता डीके चौहान ‘शोला’ एडवोकेट ने की, जबकि संचालन जय प्रकाश गुप्ता एडवोकेट ने किया। इस दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.के. चौहान ‘शोला’ ने कहा कि यह आंदोलन केवल अधिवक्ताओं या कातिबों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता के अधिकारों, पारदर्शी व्यवस्था और हजारों लोगों के रोजगार की सुरक्षा का संघर्ष है। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए निजीकरण के प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की। धरने के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि मंगलवार दोपहर 12:30 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्टों की राय लेकर आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी। आंदोलनकारियों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक एवं निर्णायक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि जनता के हित, रोजगार की सुरक्षा और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किया जा रहा है। धरना-प्रदर्शन में  रहेयुवराज सिंह चौहान,गौरी शंकर गुप्ता, महेंद्र सिंह यादव,जय प्रकाश गुप्ता, महेश चन्द्र अंजाना, जितेंद्र कुमार, रमेश शर्मा, अरविंद कुमार शर्मा,महेंद्र सिंह यादव,रंजीत पौरुष, गिरीश यादव, विजय उपाध्याय, भगवान सिंह,रूपेंद्र बघेल,प्रियांशू दरगढ़, दीपेश पाठक, सत्यवीर सिंह यादव, श्यामरूप यादव, विनय कुमार, तौकीर खान,देवेन्द्र कुमार संत आदि

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