
हाथरस 04 नवंबर। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन एवं डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर बुधवार को मथुरा रोड स्थित सेलिब्रेशन होटल एवं रेस्टोरेंट में जनपद स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सुबह 9:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित इस कार्यशाला में राज्य स्तरीय आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन टीम ने प्रतिभाग कर मिशन की कार्यप्रणाली, उपलब्धियों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में मुख्य विकास अधिकारी पीएन दीक्षित, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वेद प्रकाश, बागला संयुक्त जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सूर्य प्रकाश, जिला महिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश मोहन सक्सेना एवं आईएमए सचिव डॉ. भरत यादव उपस्थित रहे। राज्य स्तरीय टीम से डिवीजनल कोऑर्डिनेटर श्री प्रसाद एवं स्पेशलिस्ट राहुल त्रिपाठी ने प्रतिभाग किया। इनके अलावा डॉ. आरएन सिंह, नोडल अधिकारी, डॉ. राजीव रॉय, एसीएमओ डॉ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ डॉ. मधुर कुमार, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मौ. इन्तेखाब आलम, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार भारती सहित समस्त एमओआईसी, सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों के चिकित्सक तथा एनएचएम कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी चतुर सिंह ने किया। कार्यशाला के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य संस्थानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। जिला चिकित्सालय, हाथरस को मॉडल डिस्ट्रिक के रूप में चुने जाने पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सूर्य प्रकाश को सम्मानित किया गया। नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सादाबाद में 100 प्रतिशत आभा आधारित ओपीडी किए जाने पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. जुनैद तथा सहपऊ में 98 प्रतिशत ऑनलाइन ओपीडी किए जाने पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रकाश मोहन को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। निजी क्षेत्र से एबीजी हॉस्पिटल के डायरेक्टर को लागू करने के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मिशन के अंतर्गत बेहतर प्रदर्शन करने वाले अन्य प्रभारी चिकित्साधिकारियों को भी प्रशस्ति पत्र दिए गए।
कार्यशाला में बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य एक पारदर्शी एवं एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है। इसके माध्यम से मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी अभिलेख डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जा सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उपचार के दौरान उनका उपयोग किया जा सकेगा। जनपद की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि हाथरस की 18.74 लाख की अनुमानित आबादी में से लगभग 14 लाख 10 हजार नागरिकों की आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं, जो करीब 75 प्रतिशत है। वहीं जनपद की सभी 293 राजकीय स्वास्थ्य इकाइयों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री पर शत-प्रतिशत पंजीकरण पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त 16 प्रमुख अस्पतालों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ई-हॉस्पिटल एवं ई-सुश्रुत जैसी डिजिटल व्यवस्थाएं संचालित हैं। कार्यशाला में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) एवं ABDM के आपसी समन्वय पर भी विशेष जोर दिया गया। बताया गया कि आभा आईडी को मरीज के उपचार से जोड़ने पर जांच, उपचार एवं डिस्चार्ज से संबंधित पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। इससे मरीजों को पुराने मेडिकल रिकॉर्ड साथ लेकर चलने की परेशानी से राहत मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
निजी क्षेत्र की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए जानकारी दी गई कि जनपद के 489 निजी चिकित्सा प्रतिष्ठानों में से अभी तक 352 का ही पर पंजीकरण हुआ है, जो लगभग 72 प्रतिशत है। शेष निजी चिकित्सालयों एवं नर्सिंग होम संचालकों से शीघ्र पंजीकरण पूरा कराने तथा कम्प्लायंट सॉफ्टवेयर अपनाने की अपील की गई। कार्यशाला के अंत में प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक, सादाबाद डॉ. दानवीर सिंह ने उपस्थित अधिकारियों एवं चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सरकारी एवं निजी क्षेत्र के आपसी समन्वय से डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने और हाथरस को डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश का अग्रणी जनपद बनाने के लिए सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर हाथरस में कार्यशाला, 14.10 लाख लोगों की बन चुकी आभा आईडी
ABDM कार्यशाला में हाथरस की उपलब्धियों की हुई समीक्षा, बेहतर काम करने वाले चिकित्सक सम्मानित
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आभा आईडी से मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड होगा डिजिटल, हाथरस में आयोजित हुई जिला स्तरीय कार्यशाला







