सादाबाद 12 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। यूनियन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आगामी 23 अक्टूबर को राजधानी लखनऊ में महापड़ाव आयोजित करने की घोषणा की है। आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सात फरवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई समझौता वार्ता में 13 सूत्रीय मांगपत्र पर सहमति बनने के बावजूद अब तक मांगों को लागू नहीं किया गया है।
यूनियन के अनुसार समझौते के बाद अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी, लेकिन कमेटी की रिपोर्ट आने के बावजूद अंतिम बैठक नहीं बुलाई गई। इससे प्रदेशभर की आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। आशा कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से मिलने वाली 1500 रुपये की राशि में 7500 रुपये की बढ़ोतरी करने तथा आशा कार्यकर्ताओं का आधार भुगतान 10 हजार रुपये करने की मांग उठाई है। साथ ही आशा संगिनियों के भुगतान में भी समानुपातिक बढ़ोतरी की मांग की गई है। यूनियन ने आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी, पोलियो, फाइलेरिया, कुष्ठ रोग, टीबी स्क्रीनिंग, दस्तक और संचारी रोग नियंत्रण अभियान सहित विभिन्न योजनाओं की वर्षों से लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान कराने की मांग की है। आरोप है कि कई अभियानों में लगातार कार्य करने के बावजूद आशा कार्यकर्ताओं को निर्धारित भुगतान नहीं मिला है। इसके अतिरिक्त विभिन्न अभियानों के लिए प्रतिदिन 800 रुपये पारिश्रमिक निर्धारित करने, चार माह का मातृत्व अवकाश देने, दुर्घटना बीमा राशि दो लाख से बढ़ाकर दस लाख रुपये करने तथा कैशलेस चिकित्सा सुविधा के अतिरिक्त पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। आशा संगिनियों को यात्रा भत्ता अथवा भ्रमण के लिए दोपहिया वाहन उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। वहीं पिछले आंदोलनों के दौरान आशा कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि मांगों का समाधान नहीं होने पर 23 अक्टूबर को लखनऊ में महापड़ाव आयोजित कर विरोध जताया जाएगा।









