
हाथरस 09 अक्टूबर। डिजिटल युग में भले ही चिट्ठियों की जगह मोबाइल और इंटरनेट ने ले ली हो, लेकिन डाक टिकटों और पुराने लिफाफों में आज भी देश-दुनिया के इतिहास की अनमोल यादें सुरक्षित हैं। हाथरस के प्रमुख डाक टिकट संग्रहकर्ता शैलेंद्र सर्राफ ने अपने संग्रह में एक लाख से अधिक देश-विदेश के डाक टिकट, पोस्टकार्ड, लिफाफे और संचार व्यवस्था से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज संजोकर रखे हैं। राष्ट्रीय डाक दिवस के अवसर पर उन्होंने अपने इस अनूठे संग्रह के माध्यम से भारतीय डाक सेवा के गौरवशाली इतिहास और महत्व को साझा किया। भारत में प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय डाक दिवस मनाया जाता है, जबकि 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। भारतीय डाक सेवा की स्थापना वर्ष 1854 में लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में हुई थी। शैलेंद्र सर्राफ को बचपन से ही डाक टिकट संग्रह करने का शौक रहा है। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित डाक टिकट प्रदर्शनियों में जाकर दुर्लभ टिकट खरीदे और वर्षों की मेहनत से अपने संग्रह को विशाल रूप दिया। उनके संग्रह में ब्रिटिश शासनकाल के राजा-महाराजाओं, महारानी विक्टोरिया, एडवर्ड और जॉर्ज के समय के डाक टिकट, पुराने पोस्टकार्ड और लिफाफे शामिल हैं। कुछ टिकटों पर आधा पैसा, एक पैसा, तीन पाई, एक आना और दो आना जैसी कीमतें अंकित हैं। उनके पास विभिन्न रियासतों द्वारा जारी टिकटों के साथ ऐसे विशेष टिकट भी हैं, जिन्हें राजा-महाराजाओं ने जन्मदिवस और विवाह की वर्षगांठ जैसे अवसरों पर जारी कराया था। ब्रिटिश काल के ‘On His Majesty’s Service’ की मुहर वाले दस्तावेज भी उनके संग्रह की खास पहचान हैं।
शैलेंद्र सर्राफ ने बताया कि पुराने समय में हरकारों के साथ कबूतर, ऊंट, भैंसा और शिकारा जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से भी डाक पहुंचाई जाती थी। उनके संग्रह में ऐसे पुराने पत्र मौजूद हैं, जो उनके अनुसार कराची से लगभग 32 घंटे में हाथरस पहुंच गए थे। हाथरस के इतिहास से जुड़े कुछ लिफाफों पर ‘B.B.C.I. Ry.’ अंकित है, जो बॉम्बे, बड़ौदा एवं सेंट्रल इंडिया रेलवे की निजी डाक व्यवस्था से संबंधित है। उनके पास इंडियन टेलीग्राफ के तार लिफाफे, मेघदूत पोस्टकार्ड, आजाद हिंद सरकार के डाक टिकट और प्रथम दिवस आवरण भी मौजूद हैं। उनके संग्रह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, महान व्यक्तित्वों, सैनिकों के पराक्रम, खेलकूद, राष्ट्रीय त्योहारों, पशु-पक्षियों, शिक्षा, विज्ञान, सिनेमा, संगीत, स्वास्थ्य, सामाजिक सुधार, राष्ट्रीय स्मारकों और सरकारी योजनाओं से संबंधित डाक टिकट भी शामिल हैं। इसके अलावा अंग्रेजी शासनकाल के ऐसे पोस्टकार्ड और लिफाफे भी हैं, जिन पर सनातन धर्म से जुड़े देवी-देवताओं के चित्र अंकित हैं। उन्होंने डाक विभाग की पिनकोड प्रणाली का उल्लेख करते हुए बताया कि इसकी शुरुआत 15 अगस्त 1972 को हुई थी। हाथरस शहर का प्रमुख पिनकोड 204101 है। उन्होंने डाकघर की सुकन्या समृद्धि योजना को भी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उपयोगी बताया।
शैलेंद्र सर्राफ ने कश्मीर की डल झील में स्थित तैरते डाकघर का भी जिक्र किया, जहां शिकारा यानी पारंपरिक नावों के माध्यम से डाक सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने बताया कि पुराने लिफाफों पर लगी मुहरें उस समय की डाक व्यवस्था, परिवहन और संचार के तरीकों की महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। उनके अनुसार, डाक टिकट केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और महत्वपूर्ण घटनाओं को संजोने वाला दस्तावेज है। राष्ट्रीय डाक दिवस पर शैलेंद्र सर्राफ ने लोगों से भारतीय डाक सेवा का सम्मान करने और इसकी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीय डाक ने दशकों तक देश के करोड़ों लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका एक लाख से अधिक डाक टिकटों और पुराने दस्तावेजों का संग्रह इतिहास को सहेजने के प्रति उनके जुनून और समर्पण का अनूठा उदाहरण है।




