
हाथरस 07 अक्टूबर। नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन समेत विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों ने आंदोलन तेज कर दिया है। एएनएम और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) के बाद अब जिले के 592 एनएचएम संविदा कर्मियों के आंदोलन में शामिल होने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। कर्मचारियों के आंदोलन के चलते टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य समेत कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। जिले में कार्यरत 592 एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मी पांच अक्टूबर से काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत आठ से 10 अक्टूबर तक सभी कर्मचारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 12 अक्टूबर को प्रदेशभर के एनएचएम कर्मचारी लखनऊ में एकत्रित होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की तैयारी में हैं।
टीबी नियंत्रण कर्मी भी आंदोलन में शामिल
एनएचएम कर्मचारियों के आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। टीबी नियंत्रण कार्यक्रम में तैनात 17 कर्मचारियों ने भी रिक्त पदों को भरने और वेतन पुनरीक्षण की मांग को लेकर आठ अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। इन कर्मचारियों के मुताबिक वे पांच अक्टूबर से डिजिटल स्ट्राइक पर हैं। वहीं जिले में 144 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) 28 सितंबर से और 76 संविदा एएनएम एक अक्टूबर से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों के अलग-अलग संगठनों के आंदोलन में शामिल होने के चलते स्वास्थ्य विभाग के सामने सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती बढ़ती जा रही है।
829 स्वास्थ्य कर्मियों के काम बंद करने का दावा
कर्मचारी संगठनों के अनुसार आठ अक्टूबर तक सभी संबंधित संगठन आंदोलन में शामिल हो जाते हैं तो जिले के करीब 829 स्वास्थ्य कर्मी पूरी तरह कार्य से विरत हो सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों के काम से हटने की स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर जिला स्तर तक विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है।
इन सेवाओं पर पड़ सकता है असर
कर्मचारियों की हड़ताल से जिला अस्पताल और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, परिवार कल्याण सेवाओं, टीकाकरण अभियान और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संचालित गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को लागू करने में संविदा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, रिक्त पदों को भरने और वेतन संबंधी अन्य मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। अब अलग-अलग स्वास्थ्य कर्मचारी संगठनों के एक साथ आंदोलन में आने से विभाग के सामने व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। हालांकि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रखने के लिए विभाग की ओर से क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी, यह स्थिति आगे स्पष्ट होगी।








